कार्यकर्ता और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक को पेट से जुड़ी समस्याओं की शिकायत के बाद 31 जनवरी को चिकित्सकीय जांच के लिए एम्स जोधपुर ले जाया गया, अधिकारियों ने बताया।
वांगचुक, जो 27 सितंबर 2025 से जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं, को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अस्पताल के आपातकालीन विभाग में ले जाया गया। अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग में लगभग डेढ़ घंटे बिताए, जिसके बाद उन्हें वापस जेल ले जाया गया।
एम्स सूत्रों के मुताबिक, वांगचुक को पेट से संबंधित समस्याएं हो रही हैं और वह 30 जनवरी को भी चिकित्सकीय जांच के लिए अस्पताल आए थे।
सुप्रीम कोर्ट वर्तमान में वांगचुक की पत्नी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है और उसने 2 फरवरी तक उनकी मेडिकल रिपोर्ट तलब की है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने जेल प्रशासन को किसी सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर, विशेष रूप से गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, से जांच कराने के निर्देश दिए।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर प्रस्तुत दलीलों पर गौर करते हुए कहा कि मरीज की जरूरतों के अनुसार चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने अदालत को बताया कि पिछले चार महीनों में जेल के डॉक्टरों ने वांगचुक की 21 बार जांच की है, जिसमें सबसे हालिया जांच 26 जनवरी को हुई थी।
हालांकि, वांगचुक के वकील कपिल सिब्बल ने इस दलील पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनके मुवक्किल लगातार पेट दर्द से पीड़ित हैं, जिसका कारण उन्होंने जेल में उपलब्ध कराए जा रहे पानी की गुणवत्ता को बताया।
अदालत ने विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए संबंधित अधिकारियों को उचित इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
अधिकारियों के अनुसार, वांगचुक ने हिरासत में रहते हुए कई बार अपनी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जताई है।
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