केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नौवां केंद्रीय बजट पेश करने से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस दौरान बजट के प्रमुख बिंदुओं और संसदीय तैयारियों पर चर्चा हुई।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को संसद में वित्त वर्ष 2026–27 का केंद्रीय बजट पेश करने से कुछ घंटे पहले राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भेंट की।

सीतारमण अपनी अब परिचित हो चुकी डिजिटल ‘बही-खाता’ के साथ पहुंचीं लाल कपड़े में लिपटी टैबलेट, जिस पर राष्ट्रीय प्रतीक अंकित था। यह परंपरा उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में अपनाई है। यह उनका लगातार नौवां बजट होगा, जिससे वह पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बराबर पहुंच जाएंगी और प्रणब मुखर्जी से आगे निकल जाएंगी। स्वतंत्र भारत में सबसे अधिक बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के नाम है।
लोकसभा की कार्यसूची के अनुसार, सदन की बैठक सुबह 11 बजे होगी। सीतारमण संसद के समक्ष वर्ष 2026–27 के लिए भारत सरकार की अनुमानित आय और व्यय का विवरण प्रस्तुत करेंगी। साथ ही वह वित्तीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003 के तहत दो अनिवार्य दस्तावेज भी पेश करेंगी मध्यम अवधि राजकोषीय नीति सह राजकोषीय नीति रणनीति विवरण और व्यापक आर्थिक ढांचा विवरण।

इसके बाद वित्त मंत्री वित्त विधेयक, 2026 को पेश करने की अनुमति मांगेंगी और उसे औपचारिक रूप से लोकसभा में प्रस्तुत करेंगी। यह विधेयक बजट में घोषित सरकार के कर और व्यय प्रस्तावों को वैधानिक आधार प्रदान करता है।
यह बजट प्रस्तुति गुरुवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के पेश किए जाने के बाद हो रही है। यह एक लंबे समय से चली आ रही पूर्व-बजट प्रक्रिया है, जिसमें पिछले वर्ष के दौरान अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन की समीक्षा की जाती है और राजकोषीय निर्णयों के लिए पृष्ठभूमि तैयार की जाती है। मुख्य आर्थिक सलाहकार के अधीन आर्थिक कार्य विभाग के आर्थिक प्रभाग द्वारा तैयार यह सर्वेक्षण दो भागों में जारी किया जाता है, जिसमें प्रमुख व्यापक आर्थिक रुझान और विभिन्न क्षेत्रों के विकास का विवरण होता है।
आर्थिक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि प्रथम अग्रिम अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2025–26 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिससे भारत लगातार चौथे वर्ष दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। उन्होंने अप्रैल–दिसंबर 2025 के दौरान खुदरा मुद्रास्फीति 1.7 प्रतिशत रहने की भी जानकारी दी, जिसका प्रमुख कारण खाद्य पदार्थों, खासकर सब्जियों और दालों की कीमतों में गिरावट बताया गया।

गोयल ने कहा कि सरकार की विनिर्माण रणनीति ‘स्वदेशी’ से ‘रणनीतिक लचीलापन’ और अब ‘रणनीतिक अपरिहार्यता’ की ओर विकसित हुई है, जिसका उद्देश्य घरेलू उत्पादों पर भरोसा बढ़ाना है।
संसद का बजट सत्र 65 दिनों तक चलेगा, जिसमें कुल 30 बैठकें होंगी और इसका समापन 2 अप्रैल को होगा। दोनों सदन 13 फरवरी को अवकाश के लिए स्थगित होंगे और 9 मार्च को पुनः बैठक करेंगे, ताकि स्थायी समितियां विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों की जांच कर सकें।
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