अगरतला में स्ट्रीट डॉग्स के गायब होने से चिंता, NGO ने नसबंदी के नाम पर अवैध पकड़ का जताया शक

अगरतला में स्ट्रीट डॉग्स के गायब होने से चिंता, NGO ने नसबंदी के नाम पर अवैध पकड़ का जताया शक

अगरतला के कई इलाकों से स्ट्रीट डॉग्स के अचानक गायब होने की घटनाओं में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी जा रही है। इस पर पशु कल्याण संगठनों ने गंभीर चिंता जताते हुए आशंका व्यक्त की है कि नसबंदी के नाम पर अवैध रूप से कुत्तों को पकड़ा जा रहा है।

पिछले कुछ दिनों में सामने आई कई घटनाओं के बाद एनजीओ ने स्थानीय निवासियों से सतर्क रहने और खुद को पशु कल्याण से जुड़ा बताने वाले लोगों की पहचान व प्रमाण पत्र की जांच करने की अपील की है।

पॉज़सम एनजीओ के प्रतिनिधि ऋभेद दत्ता के अनुसार, शहर के अलग-अलग हिस्सों से कम से कम चार शिकायतें प्राप्त हुई हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ अज्ञात लोग जूट के बोरे में भरकर स्ट्रीट डॉग्स को उठा ले जा रहे हैं। जब स्थानीय लोगों ने उनसे पूछताछ की, तो उन्होंने खुद को नसबंदी कार्यक्रमों से जुड़े एनजीओ का कर्मचारी बताया।

हालांकि, पॉज़सम एनजीओ ने इस तरह की किसी भी गतिविधि में अपनी संलिप्तता से साफ इनकार किया है। दत्ता ने कहा कि उनकी संस्था इलाज, रेस्क्यू या नसबंदी के लिए कभी भी जूट के बोरे का इस्तेमाल नहीं करती। उन्होंने इसे वयस्क कुत्तों के लिए असुरक्षित और अमानवीय तरीका बताया।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी वास्तविक पशु कल्याण संगठन ऐसी प्रथाओं का पालन नहीं करता। जूट के बोरे के इस्तेमाल से गंभीर संदेह पैदा होता है कि कुछ डॉग हेटर्स एनजीओ के नाम का दुरुपयोग कर स्ट्रीट डॉग्स को अवैध रूप से उनके इलाकों से हटा रहे हैं।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पॉज़सम एनजीओ ने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया है। साथ ही, संस्था ने अपने स्वयंसेवकों को अलर्ट पर रखते हुए संवेदनशील इलाकों में देर रात गश्त शुरू कर दी है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और कुत्तों के गायब होने की घटनाओं को रोका जा सके।

इसी तरह की चिंता व्यक्त करते हुए अगरतला की एक अन्य पशु कल्याण संस्था के-नाइन (K Nine) एनजीओ ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज के जरिए सार्वजनिक चेतावनी जारी की है। संगठन ने हाल ही में स्ट्रीट डॉग्स से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद डॉग स्मगलिंग में बढ़ोतरी का आरोप लगाया है।

के-नाइन एनजीओ का कहना है कि उन्हें रोज़ाना इस तरह की घटनाओं को लेकर कई संदेश मिल रहे हैं और कथित तौर पर तस्कर खुलेआम एनजीओ से जुड़े होने का झूठा दावा कर कुत्तों को उठा रहे हैं। संस्था ने स्पष्ट किया कि उसका रेस्क्यू कार्य केवल बीमार, घायल, लकवाग्रस्त या गंभीर रूप से बीमार कुत्तों तक सीमित है और वह स्वस्थ स्ट्रीट डॉग्स को नहीं उठाती।

एनजीओ ने कहा कि पहले से ही उनकी देखरेख में मौजूद जानवरों को संभालना मुश्किल हो रहा है और एनजीओ के नाम पर कुत्तों को अवैध रूप से हटाने से न सिर्फ जनता में अविश्वास बढ़ रहा है, बल्कि वास्तविक पशु कल्याण प्रयासों की साख भी प्रभावित हो रही है। संगठन ने नागरिकों से सतर्क रहने, एनजीओ बताने वालों की पहचान सत्यापित करने और ऐसे लोगों की पहचान में सहयोग करने की अपील की है जो पशु कल्याण के नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं।

इस बीच, डॉग लवर दिब्येंदु चकमा ने बताया कि उनके इलाके से भी कई कुत्ते गायब हो गए हैं, खासकर तड़के सुबह के समय। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने और जागरूकता फैलाने की अपील की है, ताकि आगे ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

अगरतला के पशु कल्याण समूह अब जिम्मेदार नागरिकों, पुलिस और प्रशासन से समन्वित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि इन घटनाओं की जांच हो सके, स्ट्रीट डॉग्स की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और फर्जी तत्वों की वजह से वैध रेस्क्यू संगठनों की छवि खराब न हो।

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