दशकों तक, जेफ्री एपस्टीन और उसकी सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल ने छात्रवृत्ति, नकद पैसे और बेहतर भविष्य के झूठे वादों के ज़रिये कमजोर लड़कियों को अपने जाल में फंसाया। यह शोषण का नेटवर्क फ्लोरिडा, न्यूयॉर्क, न्यू मैक्सिको, यूरोप और यूएस वर्जिन आइलैंड्स तक फैला हुआ था।
इसकी शुरुआत मिशिगन के एक समर आर्ट्स कैंप में हुई, जहां 14 साल की एक लड़की जिसे दस्तावेज़ों में ‘जेन’ कहा गया की मुलाकात घिसलेन मैक्सवेल से हुई, जो अपने कुत्ते के साथ टहल रही थी। बातचीत सामान्य थी, लेकिन जल्द ही 41 वर्षीय जेफ्री एपस्टीन भी शामिल हो गया। उसने छात्रवृत्तियों और अपने नाम पर बने कैंप लॉज की बातें कीं। जो मासूम बातचीत लग रही थी, वही शोषण की पहली सीढ़ी बन गई।
कुछ ही समय बाद एपस्टीन ने फ्लोरिडा के पाम बीच में जेन की मां को अपने आलीशान घर बुलाया। उसने लड़की की तारीफ की और मदद का भरोसा दिलाया। कुछ महीनों में ही जेन से पैसों के बदले ‘मसाज’ करवाए जाने लगे, जो बाद में यौन शोषण में बदल गए। वह करीब तीन साल तक इस जाल में फंसी रही।
जेन की कहानी उन सैकड़ों मामलों में से एक है, जो अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) द्वारा जारी 35 लाख से अधिक पन्नों की फाइलों में दर्ज हैं। इनमें ईमेल, पुलिस रिपोर्ट, तस्वीरें और पीड़िताओं के बयान शामिल हैं। DoJ के मुताबिक, एपस्टीन ने 1,000 से ज्यादा महिलाओं का शोषण किया, जिनमें से अधिकतर की पहचान गोपनीय रखी गई है।
एपस्टीन के तरीके जगह के अनुसार अलग थे। फ्लोरिडा में वह गरीब इलाकों की लड़कियों को पैसे देकर ‘मसाज’ के लिए बुलाता था। न्यूयॉर्क में वह महत्वाकांक्षी युवतियों को छात्रवृत्ति, ऊंचे संपर्क और पार्टियों के निमंत्रण का लालच देता था। पूर्वी यूरोप में मॉडलिंग के ज़रिये लड़कियों को अमेरिका लाया जाता था।
रिपोर्ट के मुताबिक, घिसलेन मैक्सवेल इस नेटवर्क की मुख्य भर्तीकर्ता थी। वह स्कूलों में जाकर पारिवारिक हालात के बारे में पूछताछ करती और कमजोर लड़कियों को निशाना बनाती थी। शुरुआत में सिनेमा, शॉपिंग, तोहफे और ध्यान देकर भरोसा जीता जाता था।
एपस्टीन एक ‘मसाज’ के लिए 300 डॉलर देता था और किसी दोस्त को लाने पर अतिरिक्त 300 डॉलर, जिससे खुद को फैलाने वाला शोषण नेटवर्क बन गया।
पीड़िताओं को पाम बीच, न्यूयॉर्क, न्यू मैक्सिको, एपस्टीन के निजी द्वीप या लंदन-पेरिस तक ले जाया गया। पैसे और अवसर नियंत्रण का हथियार बने किराया, फ्लाइट, इलाज और पढ़ाई तक एपस्टीन ही तय करता था।
समय के साथ यह एक संगठित तस्करी और शोषण रैकेट बन गया। बरामद डायरीज़ में बार-बार गर्भधारण का ज़िक्र है, जहां पीड़िताओं ने खुद को “मानव इनक्यूबेटर” तक बताया।
एपस्टीन ने 2019 में जेल में आत्महत्या कर ली, जबकि मैक्सवेल को 2022 में 20 साल की सजा सुनाई गई।
2020 में बने मुआवज़ा फंड से 150 पीड़िताओं को 120 मिलियन डॉलर दिए गए, लेकिन कई के लिए यह दर्द कभी खत्म नहीं हुआ।
“यह एक डरावनी कहानी है, जिससे मैं बचकर निकली हूं। आज भी लगता है कि जेफ्री हर मोड़ पर मौजूद है,” एक पीड़िता की डायरी में लिखा गया।
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