भारत से वैक्सीन आपूर्ति बंद होने से शहबाज शरीफ सरकार मुश्किल में

भारत से वैक्सीन आपूर्ति बंद होने से शहबाज शरीफ सरकार मुश्किल में

आर्थिक रूप से बदहाली झेल रहा पाकिस्तान एक और गंभीर संकट का सामना कर रहा है। शहबाज शरीफ सरकार के लिए मुश्किलें तब और बढ़ गईं, जब भारत से सस्ती वैक्सीन की आपूर्ति बंद हो गई। पिछले साल मई में हुए सैन्य टकराव के बाद पाकिस्तान ने भारत से किफायती वैक्सीन खरीदना रोक दिया था। अब रिपोर्ट्स के मुताबिक, अन्य देशों से मिलने वाली मुफ्त वैक्सीन आपूर्ति भी रुक गई है।

पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री सैयद मुस्तफा कमाल ने चेतावनी दी है कि सस्ती वैक्सीन की आपूर्ति बाधित होने के कारण अब पाकिस्तान को तीन गुना कीमत पर वैक्सीन खरीदनी पड़ रही है। इससे पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कर्ज और गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।

पाकिस्तान हर साल करीब 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वैक्सीन खरीदता है, जिसमें से 49 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा GAVI के माध्यम से कवर किया जाता है, जबकि शेष 51 प्रतिशत खर्च सरकार वहन करती है। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यदि देश में वैक्सीन का स्थानीय उत्पादन शुरू नहीं हुआ, तो 2031 तक यह वार्षिक खर्च बढ़कर 1.2 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा। वहीं, मंत्री कमाल ने यह भी बताया कि 2031 के बाद अंतरराष्ट्रीय सहायता समाप्त हो जाएगी।

इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री ने खुलासा किया था कि पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ स्थानीय स्तर पर वैक्सीन निर्माण को लेकर समझौते के बेहद करीब है और अगले तीन वर्षों में उत्पादन शुरू हो सकता है।

परंपरागत रूप से पाकिस्तान अपने टीकाकरण कार्यक्रमों के लिए GAVI के माध्यम से सस्ती वैक्सीन खरीदता रहा है, जिनकी आपूर्ति भारत से होती थी। दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद GAVI कार्यक्रम जारी रहा और कोविड-19 संकट के दौरान भी भारत से पाकिस्तान को वैक्सीन मिली। हालांकि, पिछले साल हुए सैन्य संघर्ष के बाद भारत से वैक्सीन की आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई।

गौरतलब है कि पाकिस्तान अपने नागरिकों को कुल 13 प्रकार की वैक्सीन उपलब्ध कराता है, लेकिन इनमें से एक भी देश में निर्मित नहीं होती। दुनिया का पांचवां सबसे अधिक आबादी वाला देश होने के कारण पाकिस्तान की जनसंख्या लगभग 24 करोड़ है। हर साल करीब 62 लाख बच्चों का जन्म होता है, जिन्हें टीकाकरण की आवश्यकता होती है, जिससे वैक्सीन की मांग लगातार बढ़ती जा रही है।

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