भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने मंगलवार को ‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील’ की घोषणा की, जिसे ‘डैडी’ ट्रंप पसंद नहीं करेंगे। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोप और भारत दोनों पर अपने कार्यकाल में दबाव डाला और टैरिफ़ लगाए, लेकिन भारत-ईयू समझौते ने उनके दबाव को नजरअंदाज किया।
ट्रंप और उनके सहयोगियों ने भारत पर रूसी तेल के व्यापार के लिए 50% टैरिफ़ लगाया, जबकि यूरोप ने भारत के साथ व्यापार समझौता करके उनके लिए एक चुनौती पेश की। भारत ने ट्रंप के दबावों के बावजूद अपने हितों की रक्षा की और एक संतुलित समझौते के लिए यूरोप के साथ बातचीत की।
यह समझौता भारत और यूरोप दोनों के लिए लाभकारी है। भारत को अपने प्रमुख निर्यात क्षेत्रों जैसे वस्त्र, रसायन, गहने और आभूषणों पर टैरिफ़ राहत मिलेगी, जबकि यूरोपीय ऑटोमोबाइल कंपनियों को भारत के बाजार में अधिक पहुंच मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता अमेरिका को भी भारत के साथ नई ट्रेड डील करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
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