Ac/id att/ack मामलों में सख्ती की जरूरत: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की संपत्ति जब्ती पर उठाया सवाल

Ac/id att/ack मामलों में सख्ती की जरूरत: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की संपत्ति जब्ती पर उठाया सवाल

एसिड अटैक पीड़िता शाहीन मलिक की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों में कड़ी सजा की जरूरत पर जोर दिया है। अदालत ने सुझाव दिया कि आरोपियों की संपत्ति जब्त कर नीलाम की जाए, ताकि पीड़ितों को मुआवजा दिया जा सके। शाहीन मलिक ने अपने मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को बरी किए जाने को चुनौती दी है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि एसिड अटैक जैसे अपराधों में सुधारात्मक दृष्टिकोण की कोई गुंजाइश नहीं है और केंद्र सरकार को आरोपियों के लिए सजा को और सख्त बनाना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “हमें कुछ असाधारण कदम उठाने होंगे। जब तक सजा दर्दनाक नहीं होगी, ऐसे मामलों में सुधार की कोई जगह नहीं है। आरोपियों की संपत्ति जब्त कर पीड़ितों को मुआवजा क्यों नहीं दिया जा सकता?”

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि एसिड अटैक मामलों में सबूत का भार आरोपी पर डालने (रिवर्स बर्डन ऑफ प्रूफ) पर विचार किया जा सकता है, जैसा कि दहेज हत्या के मामलों में होता है।

शाहीन मलिक पर 2009 में, जब वह 26 वर्ष की थीं, उनके कार्यस्थल के बाहर एसिड अटैक हुआ था। हाल ही में दिल्ली की एक अदालत ने उनके कथित हमलावर को बरी कर दिया। मंगलवार को शाहीन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह अब तक 25 से अधिक सर्जरी करवा चुकी हैं, एक आंख गंवा चुकी हैं और उन्हें गंभीर शारीरिक क्षति हुई है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई निर्देश पारित नहीं किया और कहा कि उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट में मामले की पैरवी के लिए सक्षम वकील उपलब्ध कराया जाएगा।

अदालत ने कहा, “अगर हम आज कोई आदेश पारित करते हैं, तो इससे पूर्वाग्रह पैदा हो सकता है। पहले हाईकोर्ट को मामला सुनने दीजिए।”

मुख्य न्यायाधीश ने सभी हाईकोर्ट्स को एसिड अटैक मामलों की सुनवाई में तेजी लाने और लंबित मामलों का डेटा संकलित करने का निर्देश दिया। अदालत ने उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की स्थिति को “चिंताजनक” बताया, जहां क्रमशः 198 और 160 एसिड अटैक के मामले लंबित हैं।

इसके अलावा, सभी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों को एसिड अटैक पीड़ितों के लिए पुनर्वास, मुआवजा और चिकित्सा सहायता से जुड़ी मौजूदा योजनाओं पर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को वर्षवार एसिड अटैक मामलों का विस्तृत ब्योरा देने का निर्देश भी दिया है। इसमें प्रत्येक पीड़ित की चिकित्सा स्थिति, शैक्षणिक योग्यता, रोजगार और वैवाहिक स्थिति की जानकारी शामिल होगी।

अदालत ने केंद्र सरकार से यह भी विचार करने को कहा कि क्या एसिड अटैक पीड़ितों की सहायता के लिए एक समर्पित कोष (कॉर्पस) बनाया जा सकता है।

याचिका में “जबरन एसिड पिलाए जाने” के शिकार पीड़ितों का मुद्दा भी उठाया गया है। जनहित याचिका में मांग की गई है कि ऐसे पीड़ितों को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत दिव्यांग माना जाए, ताकि वे चिकित्सा सहायता, पुनर्वास और सरकारी नौकरियों में आरक्षण के पात्र बन सकें।

मुख्य न्यायाधीश ने सभी राज्यों से ऐसे पीड़ितों का डेटा उपलब्ध कराने को कहा और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को संबंधित विभागों से इस मामले को उठाने का निर्देश दिया।

मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

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