पाकिस्तान-सऊदी डील से 10 गुना बड़ा भारत-यूएई समझौता

पाकिस्तान-सऊदी डील से 10 गुना बड़ा भारत-यूएई समझौता

यह अब साफ हो चुका है कि कूटनीति में बड़े-बड़े दावे हमेशा ठोस नतीजों में नहीं बदलते। जहां पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ अपने समझौते का जमकर प्रचार किया, वहीं यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत की संक्षिप्त यात्रा ने इस्लामाबाद के दावों को पूरी तरह पीछे छोड़ दिया।

सोमवार को दिल्ली में सिर्फ डेढ़ घंटे की मुलाकात के दौरान भारत और यूएई ने 200 अरब डॉलर का आर्थिक लक्ष्य तय किया, जो पाकिस्तान के 20 अरब डॉलर के लक्ष्य से दस गुना बड़ा है। भारत-यूएई साझेदारी ने दोनों देशों की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के पैमाने को साफ तौर पर उजागर कर दिया है।

इन समझौतों में 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना से अधिक कर 200 अरब डॉलर से ऊपर ले जाने का रोडमैप शामिल है। इसके साथ ही उन्नत परमाणु तकनीकों, बड़े परमाणु रिएक्टरों और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। इन घोषणाओं की जानकारी सोमवार शाम यूएई राष्ट्रपति की भारत यात्रा के समापन के बाद दी गई। भारतीय पक्ष ने इस बैठक को “संक्षिप्त लेकिन अत्यंत सारगर्भित यात्रा” बताया।

वहीं दूसरी ओर, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान सरकार ने सऊदी अरब के साथ 20 अरब डॉलर के व्यापार और निवेश लक्ष्य को तय करने में काफी समय लगाया, लेकिन वास्तविकता यह है कि दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार सिर्फ 5.7 अरब डॉलर पर अटका हुआ है। पाकिस्तान अब भी पहले चरण के 5 अरब डॉलर निवेश को हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहा है।

इसके विपरीत, भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने पुष्टि की है कि भारत-यूएई द्विपक्षीय व्यापार पहले ही 100 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर चुका है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई राष्ट्रपति ने इसे 2032 तक 200 अरब डॉलर तक ले जाने का निर्णय लिया है।

समझौतों के तहत एक महत्वपूर्ण दीर्घकालिक करार यह भी है कि हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) वर्ष 2028 से शुरू होने वाले 10 वर्षों के लिए अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC Gas) से 0.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMPTA) एलएनजी खरीदेगी।

जहां पाकिस्तान सऊदी अरब से क्रेडिट पर तेल और रिफाइनरी परियोजनाओं पर चर्चा कर रहा है, वहीं भारत और यूएई भविष्य की तकनीकों पर साझेदारी कर रहे हैं। इसी कड़ी में गुजरात सरकार और यूएई के निवेश मंत्रालय के बीच ढोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन के विकास के लिए एक लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए गए।

इस परियोजना के तहत रणनीतिक बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा, जिसमें अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, पायलट प्रशिक्षण स्कूल, मेंटेनेंस-रिपेयर-ओवरहॉल (MRO) सुविधा, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट और स्मार्ट अर्बन टाउनशिप शामिल हैं। इसके अलावा रेलवे कनेक्टिविटी और ऊर्जा अवसंरचना से जुड़े प्रोजेक्ट भी शामिल होंगे।

व्यापार और निवेश से आगे बढ़ते हुए, भारत और यूएई ने अंतरिक्ष, रक्षा और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए भी समझौते किए हैं। इसके तहत यूएई की G42 कंपनी भारत में सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर की स्थापना में सहयोग करेगी।

दोनों देश डिजिटल डेटा एंबेसी और अबू धाबी में ‘हाउस ऑफ इंडिया’ स्थापित करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। व्यापार को और विस्तार देने के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को जोड़ने और नए बाजार खोलने पर ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए भारत मार्ट, वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर और भारत-अफ्रीका सेतु जैसी पहलों को आगे बढ़ाया जाएगा।

जहां पाकिस्तान का 20 अरब डॉलर का लक्ष्य अभी भी कागजी सपना बना हुआ है और ज्यादातर कर्ज या बेलआउट पैकेजों पर आधारित है, वहीं भारत का 200 अरब डॉलर का लक्ष्य मजबूत आर्थिक आधार पर टिका है, क्योंकि यह 100 अरब डॉलर का आंकड़ा हासिल करने के बाद तय किया गया है।

इसके अलावा, जिस 5 अरब डॉलर के लिए शहबाज शरीफ सरकार महीनों से रियाद के चक्कर काट रही है, उतनी राशि भारत और यूएई किसी एक परियोजना-जैसे ढोलेरा या किसी डेटा सेंटर-में आसानी से निवेश करने की क्षमता रखते हैं।

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