6 मिनट में पहुंची Blinkit एंबुलेंस, दिल्ली के युवक की दादी की बची जान

6 मिनट में पहुंची Blinkit एंबुलेंस, दिल्ली के युवक की दादी की बची जान

दिल्ली के शिवम कुकरेजा ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट साझा कर बताया कि कैसे ब्लिंकिट की एंबुलेंस कुछ ही मिनटों में उनके घर पहुंची और उनकी दादी की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।

शिवम कुकरेजा के अनुसार, इस हफ्ते की शुरुआत में सुबह करीब 8 बजे उनकी दादी अचानक घर में गिर पड़ीं और बेहोश हो गईं, हालांकि उनकी धड़कन चल रही थी।

दादी की जान बची

उन्होंने लिखा, “हम बहुत घबरा गए थे और समझ नहीं पा रहे थे कि क्या करें।” परिवार ने तुरंत आपातकालीन नंबर 112 पर कॉल किया, लेकिन एंबुलेंस के पहुंचने में समय लग रहा था।

हर पल की अहमियत को समझते हुए शिवम को ब्लिंकिट ऐप में मौजूद एंबुलेंस सेवा याद आई। उन्होंने तुरंत ऐप के जरिए एंबुलेंस बुक की, जिसमें अनुमानित समय सिर्फ 6 मिनट दिखाया गया।

दादी की जान बची

अनुरोध डालने के एक मिनट के भीतर उन्हें कन्फर्मेशन कॉल आ गई और अगले चार मिनट में दो नर्सों के साथ एंबुलेंस उनके घर पहुंच गई। मेडिकल टीम ने दादी की जांच की और पाया कि उनका ब्लड शुगर लेवल गिरकर 40 तक पहुंच गया था।

तुरंत इलाज शुरू किया गया, ड्रिप लगाई गई और करीब 10 मिनट के भीतर दादी को होश आ गया। इसके बाद उन्हें आगे के इलाज के लिए सुरक्षित रूप से अस्पताल ले जाया गया।

Blinkit Ambulance

परिवार के लिए सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि यह पूरी सेवा बिल्कुल मुफ्त थी। शिवम के अनुसार, एंबुलेंस स्टाफ ने कहा, “यह ब्लिंकिट का भरोसा है, हम यह सेवा मुफ्त में देते हैं,” और टिप देने की कोशिश भी विनम्रता से ठुकरा दी।

पोस्ट के कमेंट सेक्शन में कई लोगों ने आपात स्थितियों में तेज़ रफ्तार और तकनीक की भूमिका की सराहना की। एक यूज़र ने मेडिकल स्टाफ को “नई पीढ़ी के हीरो” बताया और इसे “जिम्मेदार नवाचार” का उदाहरण कहा। वहीं, दूसरे यूज़र ने कहा कि सही इरादों से बनी तकनीक ज़िंदगियां बचा सकती है।

Blinkit Ambulance

गौरतलब है कि ब्लिंकिट ने जनवरी पिछले साल अपनी रैपिड-रिस्पॉन्स एंबुलेंस सेवा शुरू की थी, जिसका उद्देश्य 10 मिनट के भीतर आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। हर एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर, AED, स्ट्रेचर, मॉनिटर, सक्शन मशीन और जरूरी दवाएं मौजूद होती हैं।

हर वाहन में एक प्रशिक्षित पैरामेडिक, सहायक और योग्य ड्राइवर तैनात होता है। यह सेवा पूरी तरह नॉन-प्रॉफिट मॉडल पर संचालित की जा रही है।

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