पद्म पुरस्कार 2026! पूर्वोत्तर के 8 लोगों को ‘Unsung Heroes’ श्रेणी में पद्म श्री सम्मान

पद्म पुरस्कार 2026!

पूर्वोत्तर भारत के आठ विशिष्ट व्यक्तियों को उनके निःस्वार्थ और उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्म श्री पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। ये पुरस्कार गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर घोषित किए गए।

इस वर्ष देशभर से कुल 45 व्यक्तियों को यह प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान प्रदान किया गया।

पूर्वोत्तर के पुरस्कार प्राप्त करने वालों में असम से 3, तथा मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, त्रिपुरा और नागालैंड से एक-एक व्यक्ति शामिल हैं। यह सम्मान क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक, सामाजिक और पारंपरिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर करता है।

पुरस्कार प्राप्त करने वाले इस प्रकार हैं-

युमनाम जात्रा सिंह (मणिपुर):

 युमनाम जात्रा सिंह
मणिपुरी नृत्य के एक महान हस्ती, युमनाम जात्रा सिंह ने अपना पूरा जीवन नाता संकीर्तन को समर्पित कर दिया। कला की मूल शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने राजघरानों और आम जनता के बीच की दूरी को अपने प्रदर्शनों के माध्यम से पाटा। 100 वर्ष की आयु में भी वे युवा कलाकारों को मार्गदर्शन दे रहे हैं और इस पवित्र परंपरा के विस्तार में योगदान दे रहे हैं।

टेची गुबिन (अरुणाचल प्रदेश):

टेची गुबिन
राष्ट्रीय एकता में दृढ़ विश्वास रखने वाले टेची गुबिन ने न्यीशी समुदाय की स्वदेशी आस्था और संस्कृति को संरक्षित करने के लिए अथक प्रयास किए हैं। उन्होंने 90 से अधिक सीमावर्ती गांवों की यात्रा कर सांस्कृतिक संरक्षण का संदेश दिया और राष्ट्रीय तिरंगा फहराकर एकता और देशभक्ति को मजबूत किया।

सांग्युसांग पोंगेनर (नागालैंड):

सांग्युसांग पोंगेनर
नागा स्वदेशी लोक परंपराओं के संरक्षण और प्रचार के लिए समर्पित सांग्युसांग पोंगेनर ने पारंपरिक कला रूपों पर आधारित मौलिक लोक नाटक और गीतों की रचना की। उन्होंने 1000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें नागालैंड के सांस्कृतिक दूत के रूप में तैयार किया।

पोकिला लेकथेपी (असम):

पोकिला लेकथेपी
करबी लोक और आधुनिक संगीत में उनके असाधारण योगदान के लिए पोकिला लेकथेपी को सम्मानित किया गया है। चार दशकों से अधिक समय तक उन्होंने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया है और करबी लोक परंपरा में 300 से अधिक गीतों का योगदान दिया है, जो भूमि और विरासत से प्रेरित हैं।

नुरुद्दीन अहमद (असम):

नुरुद्दीन अहमद
प्रसिद्ध निर्देशक, कला निर्देशक, सेट और परिधान डिज़ाइनर नुरुद्दीन अहमद ने अपने पुरस्कार विजेता कार्यों के माध्यम से असमिया रंगमंच को नई पहचान दी। सीमित बजट में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय कार्यक्रमों का सफल आयोजन करते हुए उन्होंने असमिया संस्कृति के संरक्षण और मोबाइल थिएटर आंदोलन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जोगेश देउरी (असम):

जोगेश देउरी
जोगेश देउरी ने असम के कृषि और रेशम उद्योग के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया है।

हैली वार (मेघालय):

हैली वार
हैली वार को खासी परंपराओं पर आधारित पर्यावरण-अनुकूल वनीकरण पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए सम्मानित किया गया है। उन्होंने स्वदेशी जैव-अभियांत्रिकी ज्ञान, विशेष रूप से पूर्वी खासी हिल्स की प्रसिद्ध ‘लिविंग रूट ब्रिज’ निर्माण में प्रयुक्त बायोवीविंग तकनीकों को संरक्षित किया और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाया।

नरेश चंद्र देबबर्मा (त्रिपुरा):

नरेश चंद्र देबबर्मा
साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें यह सम्मान दिया गया है। वे त्रिपुरा की कोकबोरोक भाषा के विकास के लिए समर्पित हैं। उन्होंने कोकबोरोक भाषा में 30 पुस्तकें लिखी हैं और भाषा से जुड़े शैक्षणिक व सांस्कृतिक विमर्श में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए बंगला या देवनागरी लिपि के उपयोग की वकालत करते हैं।

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