मेघालय के मुख्यमंत्री ने ओडिशा में ईसाई पादरी पर हमले की निंदा की; नौ आरोपी गिरफ्तार

मेघालय के मुख्यमंत्री ने ओडिशा में ईसाई पादरी पर हमले की निंदा की; नौ आरोपी गिरफ्तार

मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने ओडिशा में एक ईसाई पादरी पर हुए कथित हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे “भारत के प्रत्येक नागरिक को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का गंभीर उल्लंघन” बताया है। इस मामले में पुलिस ने अब तक नौ लोगों को हिरासत में लिया है और जांच जारी है।

सोशल मीडिया पर जारी बयान में मुख्यमंत्री संगमा ने कहा, “ओडिशा में पादरी बिपिन बिहारी नाइक पर हालिया हमला, जिसमें उन्हें जबरन गोबर खिलाया गया और धार्मिक नारे लगवाए गए, भारत के हर नागरिक को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। ईसाइयों पर बार-बार होने वाले हमले हमारे देश की विविध सांस्कृतिक और धार्मिक संरचना को कलंकित करते हैं। मैं इस घटना की कड़ी निंदा करता हूं और संबंधित अधिकारियों से आग्रह करता हूं कि वे गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ त्वरित और निर्णायक कार्रवाई करें।”

ओडिशा पुलिस ने 21 जनवरी को ढेंकानाल जिले के पारजंग गांव में पादरी बिपिन बिहारी नाइक पर हुए कथित हमले के सिलसिले में नौ व्यक्तियों को हिरासत में लिया। यह घटना जनवरी के पहले सप्ताह में हुई थी, लेकिन जांच तब शुरू हुई जब पीड़ित की पत्नी ने स्थानीय थाने की निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए सीधे ढेंकानाल के पुलिस अधीक्षक के पास शिकायत दर्ज कराई।

मेघालय के मुख्यमंत्री ने ओडिशा में ईसाई पादरी पर हमले की निंदा की; नौ आरोपी गिरफ्तार

रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपियों ने पादरी को चप्पलों की माला पहनाकर सार्वजनिक स्थानों पर घुमाया और बाद में उन्हें पारजंग पुलिस के हवाले कर दिया। परिजनों का दावा है कि स्थानीय पुलिस ने एक सप्ताह तक उनकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया। कुछ स्थानीय लोगों ने पादरी पर धर्मांतरण में संलिप्त होने का आरोप भी लगाया था।

ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने इस हमले को “हमारे संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता पर शर्मनाक हमला” करार दिया। उन्होंने कहा कि “एफआईआर दर्ज करने और जांच में देरी भारतीय जनता पार्टी सरकार की चुप्पी और नफरत को संरक्षण देने को दर्शाती है। इस तरह के हमले भारत की बहुलतावादी संरचना को विषाक्त करते हैं।”

कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) ने भी एक कड़े शब्दों वाला बयान जारी कर इस हमले को मानव गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन बताया। संगठन ने 4 जनवरी को पादरी पर कथित रूप से की गई हिंसा पर गहरा दुख व्यक्त किया।

CBCI ने कहा, “किसी व्यक्ति को जबरन गोबर खिलाना हिंसा और अपमान का घृणित कृत्य है, जो व्यक्ति की गरिमा और आस्था के मूल पर प्रहार करता है।”

संगठन ने इसे एक लोकतांत्रिक और बहुलतावादी समाज में अत्यंत चिंताजनक और अस्वीकार्य बताया।

बिशप्स कॉन्फ्रेंस ने दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की और पीड़ित को न्याय दिलाने का आग्रह किया। CBCI के प्रवक्ता फादर रॉबिन्सन रोड्रिग्स ने कहा कि धार्मिक पहचान के आधार पर होने वाले हमले समानता और अंतरात्मा की स्वतंत्रता जैसे संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करते हैं।

CBCI ने नागरिक प्रशासन से सभी नागरिकों की-चाहे उनकी धार्मिक आस्था कुछ भी हो-सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की, साथ ही नागरिकों से हिंसा को अस्वीकार कर शांति और सद्भाव के लिए सक्रिय रूप से काम करने का आह्वान किया।

Category