दक्षिण कोरिया के अपदस्थ पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को अदालत ने सत्ता के दुरुपयोग, न्याय में बाधा डालने और दस्तावेज़ों में हेरफेर के मामले में दोषी ठहराते हुए पांच साल की सजा सुनाई है। यह फैसला देश में गहरे राजनीतिक विभाजन को उजागर करता है और यून के खिलाफ चल रहे कई मुकदमों में पहला बड़ा फैसला माना जा रहा है।
अदालत के अनुसार, यून सुक येओल ने वर्ष 2024 में मार्शल लॉ लागू करने की कोशिश के दौरान गंभीर संवैधानिक उल्लंघन किए। न्यायाधीश ने कहा कि यून ने अपने राष्ट्रपति पद का दुरुपयोग करते हुए अपने बॉडीगार्ड्स का इस्तेमाल गिरफ्तारी से बचने के लिए किया, पूरे मंत्रिमंडल से सलाह लिए बिना मार्शल लॉ की घोषणा की और प्रधानमंत्री व रक्षा मंत्री के समर्थन का झूठा दस्तावेज़ तैयार कर बाद में उसे नष्ट कर दिया।
अदालत ने टिप्पणी की कि यून ने “देश को एक बड़े राजनीतिक संकट में झोंक दिया” और अपने कृत्यों पर “कोई पश्चाताप नहीं” दिखाया। अभियोजन पक्ष ने उनके लिए 10 साल की सजा की मांग की थी, जबकि यून ने दावा किया कि उनकी गिरफ्तारी और जांच अवैध थी और मार्शल लॉ के लिए पूरे कैबिनेट से सलाह लेना जरूरी नहीं था। अब दोनों पक्षों को फैसले के खिलाफ अपील के लिए सात दिन का समय दिया गया है।
यह फैसला यून के खिलाफ चल रहे चार मुकदमों की श्रृंखला में पहला है। आने वाले मामलों में उन पर सत्ता के दुरुपयोग, चुनाव कानून के उल्लंघन और सबसे गंभीर आरोप विद्रोह (इंसरेक्शन) का भी सामना करना है, जिसमें मृत्युदंड तक का प्रावधान है। इस मामले का फैसला फरवरी में आने की संभावना है।
फैसले के दौरान अदालत के बाहर लगभग 100 यून समर्थक मौजूद रहे। कुछ ने “यून, अगेन! मेक कोरिया ग्रेट अगेन” जैसे नारे लिखी तख्तियां पकड़ रखी थीं, जबकि कई लोगों ने फैसले पर नाराज़गी जताई। एक हालिया सर्वे के मुताबिक, करीब 30% नागरिकों का मानना है कि यून की कार्रवाई विद्रोह की श्रेणी में नहीं आती।
मार्शल लॉ की असफल कोशिश के छह महीने बाद देश में हुए चुनावों में विपक्षी नेता ली जे म्युंग ने निर्णायक जीत हासिल की थी। विश्लेषकों का कहना है कि यून सुक येओल के खिलाफ चल रहे मुकदमों के नतीजे दक्षिण कोरिया की राजनीति की दिशा तय करेंगे और संवैधानिक उल्लंघन के मामलों में नेताओं की जवाबदेही को लेकर एक अहम मिसाल पेश करेंगे।
- Log in to post comments