बाघ के ह/मले में शहीद हेड कांस्टेबल की पत्नी ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया

बाघ के ह/मले में शहीद हेड कांस्टेबल की पत्नी ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया

अरुणाचल प्रदेश के लोअर दिबांग वैली ज़िले में बाघ के हमले में एक हेड कांस्टेबल की मौत के कुछ दिनों बाद, उनकी पत्नी ने वन विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि घटना से कई हफ्तों पहले ही इलाके में बाघ की मौजूदगी को लेकर लगातार चेतावनियाँ दी गई थीं, लेकिन विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

दिवंगत हेड कांस्टेबल चिकसेंग मनपांग की पत्नी ख्योदा मैरी ने बताया कि मयूदिया क्षेत्र में 2 फरवरी को उनके पति की बाघ के हमले में मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों और प्रशासन ने लगभग दो महीनों तक बाघ की गतिविधियों की सूचना दी थी, इसके बावजूद वन विभाग की ओर से कोई प्रभावी सुरक्षा या रोकथाम के उपाय नहीं किए गए।

संस्थागत उदासीनता पर दुख जताते हुए ख्योदा मैरी ने अधिकारियों द्वारा घोषित ₹10 लाख की अनुग्रह राशि लेने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि आर्थिक मुआवज़ा उनके पति की क्षति की भरपाई नहीं कर सकता। उन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और दीर्घकालिक कल्याण के लिए स्थायी संस्थागत सहायता की मांग की है।

वन विभाग को सीधे तौर पर ज़िम्मेदार ठहराते हुए मैरी ने मानव–वन्यजीव संघर्ष वाले संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा तैयारियों पर सवाल उठाए और स्थानीय निवासियों व कर्मियों की सुरक्षा के लिए कड़े प्रोटोकॉल लागू करने की मांग की। इस घटना ने एक बार फिर क्षेत्र में बढ़ते मानव–वन्यजीव संघर्ष और प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दे को उजागर कर दिया है।

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