अमेरिका की एक आयोग, यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन, भारत की रणनीतिक भूमिका पर समीक्षा करने जा रही है। इस दौरान भारत-चीन संबंध, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा, व्यापार और तकनीकी प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। आयोग इस बात का भी विश्लेषण करेगा कि भारत के चीन और अमेरिका दोनों के साथ बढ़ते संबंध अमेरिका के आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों पर किस तरह असर डाल सकते हैं।
कमीशन ने बताया कि सुनवाई का विषय “भारत, चीन और इंडो-पैसिफिक में शक्ति संतुलन” होगा। इसमें हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की सैन्य और रणनीतिक भूमिका, जियोपॉलिटिकल मुद्दे, और भारत-चीन के आर्थिक संबंधों का भारत की आत्मनिर्भरता पर प्रभाव भी शामिल होगा।
सुनवाई 17 फरवरी 2026 को होगी और यह सार्वजनिक होगी, यानी आम जनता भी इसे देख सकेगी। अमेरिकी आयोग हर साल यह आकलन करता है कि चीन और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंध अमेरिका की सुरक्षा पर किस तरह असर डाल सकते हैं। इस लिहाज से भारत की भूमिका अमेरिका के लिए अहम मानी जाती है, क्योंकि भारत चीन और अमेरिका के बीच संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है।
हाल के समय में भारत और चीन के संबंध में सुधार देखने को मिला है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात साल बाद चीन का दौरा किया, हवाई सेवाएं फिर से शुरू हुईं और सीमा विवाद को हल करने के लिए बातचीत जारी है। वहीं अमेरिका के साथ भारत के आर्थिक और राजनीतिक संबंधों में तनाव भी देखा गया है। उदाहरण के लिए, पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया और कई बार सार्वजनिक बयान देकर तनाव बढ़ाया।
इस सुनवाई का उद्देश्य यह देखना है कि भारत-चीन के सुधारते संबंध अमेरिका के हितों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं और अमेरिका को आगे की नीति क्या होनी चाहिए। कमीशन सालभर कई बार बैठक करेगा और अंत में नवंबर में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा, जिसमें अमेरिका-चीन संबंध और भारत के महत्व को भी शामिल किया जाएगा।
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