शहबाज़ शरीफ के लिए अच्छी खबर: चीन की बढ़ती मांग के बीच पाकिस्तान गधों से अरबों कमाने की तैयारी, संख्या 60 लाख के पार

शहबाज़ शरीफ के लिए अच्छी खबर: चीन की बढ़ती मांग के बीच पाकिस्तान गधों से अरबों कमाने की तैयारी, संख्या 60 लाख के पार

पाकिस्तान गधों की आबादी के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। बीते पांच वर्षों में देश में गधों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है और यह अब 60 लाख (6 मिलियन) से अधिक हो चुकी है। इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ी वजह पाकिस्तान और उसके करीबी सहयोगी चीन के बीच बढ़ता व्यापारिक संबंध बताया जा रहा है।

चीन में गधों की खाल की भारी मांग है, जिसका इस्तेमाल पारंपरिक औषधीय और सौंदर्य उत्पाद ‘एजियाओ (Ejiao)’ बनाने में किया जाता है। हाल के वर्षों में एजियाओ की मांग में तेज़ उछाल देखा गया है। बीजिंग स्थित बिज़नेस और फाइनेंशियल कंसल्टिंग फर्म Newziji के अनुसार, वर्ष 2023 तक इसका बाज़ार आकार 8 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है।

पहले चीन अपनी जरूरतों के लिए अफ्रीकी देशों से गधों की खाल मंगाता था, लेकिन फरवरी 2024 में अफ्रीकी देशों द्वारा गधों की खाल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद चीनी खरीदारों ने पाकिस्तान का रुख किया। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब चीन ने पाकिस्तान पर भरोसा किया हो। वर्ष 20140-15 के दौरान भी पाकिस्तान से करीब 2 लाख गधों की खाल चीन को बेची गई थीं।

चीन की बढ़ती मांग के बीच पाकिस्तान गधों से अरबों कमाने की तैयारी, संख्या 60 लाख के पार

पाकिस्तान ने पहले गधों की बिक्री पर कुछ प्रतिबंध लगाए थे, क्योंकि आशंका थी कि गधे का मांस स्थानीय बाजार में आ सकता है। मुस्लिम समुदाय में गधे का मांस धार्मिक रूप से निषिद्ध है। इसके बावजूद, गधों की खाल का व्यापार जारी रहा। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक गधे की खाल की कीमत 3 लाख पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच सकती है। इस सिलसिले में एक चीनी नागरिक और उसके पाकिस्तानी सहयोगियों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया था।

फरवरी 2025 में, चीनी कंपनी हांगेंग ट्रेड कंपनी ने पाकिस्तान के ग्वादर में 70 लाख डॉलर की लागत से एक गधा वधशाला (slaughterhouse) स्थापित की। Nikkei की रिपोर्ट के अनुसार, यह वधशाला हर साल करीब 3 लाख गधों की आपूर्ति चीन को करेगी।

हालांकि, इस बढ़ते निर्यात को लेकर चिंताएं भी सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह निर्यात लंबे समय तक जारी रहा, तो पाकिस्तान में गधों की भारी कमी हो सकती है। यही वजह थी कि अफ्रीकी देशों को भी गंभीर कमी के बाद गधों की खाल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाना पड़ा था।

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