ईरान में बढ़ते विरोध-प्रदर्शनों, अस्थिरता और सुरक्षा चिंताओं के बीच भारत ने सतर्क रुख अपनाया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मंगलवार को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत कर ईरान और उसके आसपास तेजी से बदलते हालात पर चर्चा की।
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए लिखा, “ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का फोन आया। हमने ईरान और उसके आसपास की उभरती स्थिति पर चर्चा की।”
इस बीच, विदेश मंत्रालय (MEA) ने मौजूदा हालात को देखते हुए भारतीय नागरिकों को अगले आदेश तक ईरान की यात्रा न करने की कड़ी सलाह दी है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह एडवाइजरी एहतियातन जारी की गई है और इसका उद्देश्य अस्थिर हालात में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
ईरान में बढ़ती चिंता के बीच तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने भी एक अलग एडवाइजरी जारी कर भारतीय नागरिकों, विशेषकर छात्रों, से उपलब्ध साधनों के जरिए सुरक्षित तरीके से ईरान छोड़ने का आग्रह किया है। हालांकि, फिलहाल किसी औपचारिक निकासी (evacuation) योजना की घोषणा नहीं की गई है।
जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने ईरान में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों और अन्य भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने कहा कि हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और स्पष्ट निकासी दिशा-निर्देशों की कमी चिंता का विषय है।
JKSA ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर से अपील करते हुए कहा, “तेजी से बिगड़ती सुरक्षा स्थिति तत्काल कार्रवाई की मांग करती है। हम भारतीय नागरिकों और छात्रों की सुरक्षित निकासी के लिए ठोस कदम उठाने का अनुरोध करते हैं।”
14 जनवरी 2026 को हुई यह कूटनीतिक बातचीत दर्शाती है कि भारत ईरान में बदलते सुरक्षा हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि स्थिति के अनुसार आगे और कदम उठाए जा सकते हैं।
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