सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 15 जनवरी 2025 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच चल रहे टकराव से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट में हुई अराजकता पर गहरी नाराज़गी जताई। शीर्ष अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट परिसर में जो कुछ हुआ, वह “बेहद परेशान करने वाला” है और इसे एक गंभीर मुद्दा करार दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में नोटिस जारी करने का इरादा रखती है।
जस्टिस प्रशांत मिश्रा और विपुल पंचोली की पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कलकत्ता हाईकोर्ट में 9 जनवरी को हुई अव्यवस्था का मुद्दा उठाया गया है। पीठ ने टिप्पणी करते हुए सवाल किया कि “क्या हाईकोर्ट को जंतर-मंतर बना दिया गया था?”
केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और TMC से जुड़े लोगों ने कोलकाता स्थित I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) कार्यालय में ED की जांच और तलाशी अभियान में हस्तक्षेप किया।
मेहता ने अदालत को बताया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म के सह-संस्थापक प्रशांत जैन के आवास से सबूत अपने कब्जे में लिए, जिसे उन्होंने “चोरी” करार दिया।
मेहता ने कहा,“इस तरह के कृत्य से राज्य पुलिस अधिकारियों को ऐसे मामलों में मदद और संरक्षण देने का हौसला मिलेगा।”
उन्होंने पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार को निलंबित करने की मांग भी की।
सॉलिसिटर जनरल ने 9 जनवरी की घटनाओं को “मॉबोक्रेसी” (भीड़तंत्र) बताते हुए कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे वकील, जिनका मामले से कोई लेना-देना नहीं था, अदालत में पहुंच गए और सुनवाई बाधित कर दी, जिसके चलते न्यायाधीश को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
मेहता ने यह भी दावा किया कि वकीलों को एक व्हाट्सएप संदेश के जरिए एक तय समय पर अदालत पहुंचने के लिए कहा गया था।
तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ED ने पार्टी से जुड़े गोपनीय दस्तावेज जब्त किए हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा,
“अगर उनकी मंशा चुनावी डेटा जब्त करने की होती, तो वे कर चुके होते। आप हमें नोटिस जारी करने से नहीं रोक सकते।”
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने ED की कार्रवाई के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं।
उन्होंने कहा, “कोल स्कैम मामले में आखिरी प्रगति फरवरी 2024 में हुई थी। फिर 2026 में वे बंगाल क्यों गए? हम सभी जानते हैं कि I-PAC बंगाल में चुनाव प्रबंधन देखता है। I-PAC और TMC के बीच औपचारिक अनुबंध है।”
पीठ ने साफ कर दिया कि न्यायिक कार्यवाही में बाधा और अदालत परिसर में अराजकता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और यह मामला न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट जल्द ही इस पूरे प्रकरण पर औपचारिक नोटिस जारी कर आगे की कार्रवाई करेगा।
यह मामला अब संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा, संघीय ढांचे और जांच एजेंसियों की भूमिका जैसे अहम सवालों के केंद्र में आ गया है।
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