Ernst & Young (EY) की एक नई रिपोर्ट में भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ा और आशावादी अनुमान सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि भारत औसतन 6% की वार्षिक आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखता है, तो वर्ष 2047-48 तक देश का GDP लगभग $26 ट्रिलियन तक पहुँच सकता है, जो आज के लगभग $4.2 ट्रिलियन के स्तर से 6 गुना से भी अधिक वृद्धि को दर्शाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह वृद्धि सरकारी सुधारों, बढ़ते निवेश, मजबूत होते सेवा क्षेत्र, डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार, स्टार्टअप इकोसिस्टम, विनिर्माण में आत्मनिर्भरता, निर्यात में बढ़ोतरी और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के तेज़ विकास के कारण संभव हो सकती है।
EY ने यह भी बताया कि भारत का मध्यम वर्ग 2030 तक 60% आबादी तक पहुँच सकता है, जिससे घरेलू मांग (Consumer Demand) में भारी वृद्धि होगी और खुदरा, रियल एस्टेट, ऑटो, FMCG, पर्यटन और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों को तेज़ी मिलेगी। इसके अलावा, भारत 2047 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दौड़ में मज़बूती से आगे बढ़ सकता है, खासकर अगर FDI (Foreign Direct Investment), प्राइवेट कैपेक्स, ग्रीन एनर्जी ट्रांज़िशन, सेमीकंडक्टर और AI आधारित उद्योगों में योजनाबद्ध निवेश जारी रहा।
रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि अगले 20 वर्षों में:
1. भारत का निर्यात $2.1 ट्रिलियन से बढ़कर $5 ट्रिलियन+ हो सकता है
2. विनिर्माण (Manufacturing) की GDP हिस्सेदारी 17% से बढ़कर 25% तक पहुँच सकती है
3. डिजिटल इकोनॉमी का योगदान 10% से बढ़कर 20%+ हो सकता है
4. इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च ₹10 लाख करोड़+ सालाना तक पहुँच सकता है
5. 5G, 6G, EV, Solar, SpaceTech और Defence उत्पादन अर्थव्यवस्था को नया आधार दे सकते हैं
हालाँकि यह अनुमान सशर्त (Conditional Forecast) है और वास्तविक वृद्धि वैश्विक आर्थिक स्थितियों, ऊर्जा कीमतों, भू-राजनीतिक स्थिरता, रोजगार दर, मुद्रास्फीति (Inflation), निजी क्षेत्र के निवेश और कृषि सुधारों पर भी निर्भर करेगी, लेकिन EY का कहना है कि भारत के पास इस लक्ष्य को पाने की क्षमता और जनसांख्यिकीय लाभ (Demographic Advantage) दोनों मौजूद हैं।
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