भारत की चीता संरक्षण परियोजना ने 2025 में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में देश में 12 चीता शावकों का जन्म हुआ, जो भारत में चीता पुनर्वास कार्यक्रम की अब तक की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।
दिसंबर 2025 तक भारत में चीतों की कुल संख्या 30 तक पहुंच गई, जिनमें से 19 चीते भारत में ही जन्मे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह उपलब्धि दर्शाती है कि देश में चीता पारिस्थितिकी अब स्थिर और आत्मनिर्भर प्रजनन चक्र की ओर बढ़ रही है। 2025 में जन्मे 12 शावकों के साथ, भारत में चीता आबादी में स्वदेशी योगदान लगातार मजबूत हो रहा है।
भारत में चीता पुनर्प्रवेश परियोजना की शुरुआत 2022 में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को लाकर की गई थी। इसका उद्देश्य भारत के जंगलों में विलुप्त हो चुकी इस प्रजाति को फिर से स्थापित करना और एक संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है। परियोजना का सबसे बड़ा केंद्र मध्य प्रदेश का कूनो नेशनल पार्क रहा है, जहां चीता प्रजनन और निगरानी कार्यक्रम अत्याधुनिक तकनीकों के साथ चलाया जा रहा है।
वन्यजीव विशेषज्ञों ने इस सफलता को संरक्षण विज्ञान, अनुकूल आवास निर्माण और सतत निगरानी का सामूहिक परिणाम बताया है। वहीं, पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि आने वाले वर्षों में चीता आबादी को और बढ़ाने, उनके लिए सुरक्षित कॉरिडोर तैयार करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इस उपलब्धि पर केंद्र सरकार ने संतोष जताया है और कहा है कि चीता संरक्षण परियोजना भारत की वैश्विक संरक्षण प्रतिबद्धताओं का मजबूत प्रमाण है। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को शावकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और प्राकृतिक व्यवहार को बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
इस सफलता ने भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में ला खड़ा किया है, जहां पुनर्प्रवेश के बाद चीता प्रजाति ने न केवल खुद को ढाला, बल्कि तेजी से प्रजनन भी किया।

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