ताज़ा परमाणु वार्ता से पहले ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा है कि तेहरान युद्ध और शांति दोनों के लिए तैयार है। क्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका की बढ़ती सैन्य मौजूदगी के बीच तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
एक विशेष साक्षात्कार में अराघची ने चेतावनी दी कि किसी भी टकराव की स्थिति में संघर्ष तेजी से ईरान और अमेरिका से आगे बढ़कर पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है, जिससे “विनाशकारी” युद्ध हो सकता है।
ईरान-अमेरिका वार्ता का तीसरा दौर गुरुवार को जिनेवा में होने वाला है, जिसकी मध्यस्थता ओमान कर रहा है। पिछली बैठकों में संभावित समझौते के लिए सामान्य सिद्धांत तय किए गए थे, लेकिन यूरेनियम संवर्धन और मिसाइल सीमाओं को लेकर बड़े मतभेद अभी भी बने हुए हैं।
अराघची ने कहा कि एक “न्यायसंगत और संतुलित” समझौता संभव है, लेकिन उन्हें अमेरिका की मंशा पर पूरी तरह भरोसा नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक के अपने अधिकार को छोड़ने को तैयार नहीं है।
मिसाइल कार्यक्रम पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित नहीं कर रहा और उसकी सीमा जानबूझकर 2000 किलोमीटर से कम रखी गई है ताकि वह वैश्विक खतरा न बने, बल्कि केवल रक्षा के लिए उपयोग हो।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संघर्ष हुआ तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी इसमें शामिल हो जाएंगे और स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है। “किसी की जीत नहीं होगी, यह विनाशकारी युद्ध होगा,” उन्होंने कहा।
अराघची ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान मौतों के आंकड़ों पर किए गए दावों को भी गलत बताया। उन्होंने कहा कि ईरान ने 3,117 मृतकों की सूची प्रकाशित की है, जबकि मानवाधिकार संगठन Human Rights Activists News Agency ने 7,000 से अधिक लोगों के मारे जाने का अनुमान जताया है।
तेज बयानबाज़ी के बावजूद उन्होंने संकेत दिया कि जिनेवा वार्ता में समझौते की संभावना अभी भी मौजूद है।
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