UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान (MBZ) सोमवार को भारत का दौरा कर सकते हैं। यह दौरा नयी दिल्ली और अबू धाबी के बीच बढ़ते सहयोग का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब UAE और सऊदी अरब के बीच तनाव बढ़ रहा है और ईरान सहित क्षेत्रीय राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव हो रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, MBZ का दौरा संक्षिप्त और आधे दिन का होगा। उनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ व्यक्तिगत संबंधों ने भारत-यूएई संबंधों को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई है। MBZ पहले भी अबू धाबी के क्राउन प्रिंस के रूप में 2016 और 2017 में भारत का दौरा कर चुके हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने G20 लीडर्स समिट 2023 में भाग लिया और वर्चुअल ग्लोबल साउथ समिट 2023 में हिस्सा लिया। जनवरी 2024 में वह 10वें वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट के मुख्य अतिथि भी रहे, जो भारत-यूएई संबंधों की स्थिरता और गहराई को दर्शाता है।
भारत-UAE संबंध हाल के वर्षों में तेजी से बढ़े हैं, खासकर 2022 में Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) पर हस्ताक्षर के बाद। द्विपक्षीय व्यापार 2025 में नए स्तर पर पहुँच गया, जिसमें नॉन-ऑयल ट्रेड ने साल के पहले छह महीनों में लगभग $37.6 बिलियन का आंकड़ा पार किया। यदि यह रफ्तार बनी रहती है, तो दोनों देश 2030 तक $100 बिलियन नॉन-ऑयल ट्रेड का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।
UAE भारत का सातवां सबसे बड़ा FDI स्रोत भी है। 2000 से अब तक UAE से भारत में कुल FDI प्रवाह $22 बिलियन से अधिक हो चुका है, जो दीर्घकालिक आर्थिक महत्व को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि MBZ का दौरा द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगा, आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देगा और क्षेत्र में तेजी से बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों में रणनीतिक समन्वय को गहरा करेगा।
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