महंगाई के इस दौर में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ी चिंता उनकी पेंशन है। वर्षों की सेवा के बाद यदि उन्हें मिलने वाली राशि उनके दैनिक खर्चों को भी पूरा नहीं करती है, तो वरिष्ठ नागरिकों के लिए कठिनाइयाँ और बढ़ जाती हैं। इसी संदर्भ में केंद्रीय बजट 2026 से पहले एक उम्मीद की किरण सामने आई है। सरकार अब लंबे समय से चली आ रही न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग पर गंभीरता से विचार कर रही है।
केंद्र सरकार केंद्रीय बजट 2026 को 1 फरवरी को संसद में पेश करेगी। इस बजट सत्र की शुरुआत 28 जनवरी से होगी और यह 2 अप्रैल तक चलेगा। रिपोर्टों के अनुसार, इस वर्ष या उसके तुरंत बाद कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े पेंशनभोगियों के लिए बड़ी घोषणा की जा सकती है।
वर्तमान में, EPFO के तहत आने वाले कर्मचारियों को न्यूनतम पेंशन मासिक 1,000 रुपये मिलती है। आश्चर्य की बात है कि यह राशि पिछले 11 वर्षों से समान बनी हुई है, जबकि इस दौरान महंगाई में काफी वृद्धि हुई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्तमान आर्थिक स्थिति में 1,000 रुपये की पेंशन पर्याप्त नहीं है।
6 जनवरी को भारतीय मजदूर संघ (BMS) के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया से इस मुद्दे पर चर्चा की। बैठक में न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग जोरदार तरीके से उठाई गई और मंत्री ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए आश्वासन दिया कि इस मामले पर सही ध्यान दिया जाएगा। अन्य कर्मचारी संगठन भी न्यूनतम पेंशन को मासिक 7,000 से 10,000 रुपये तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
यह मामला केवल सरकार तक सीमित नहीं है। वर्तमान में न्यूनतम पेंशन का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसका मतलब है कि सरकार जल्द ही इस संबंध में ठोस निर्णय ले सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 का केंद्रीय बजट इस मामले में एक मोड़ साबित हो सकता है।
इस बीच, EPFO अपनी सेवाओं को और अधिक सुलभ बनाने पर भी काम कर रहा है। संगठन ‘फैसिलिटेशन असिस्टेंट्स’ तैनात करने की योजना बना रहा है, जो सदस्यों को पेंशन, PF क्लेम, खाता लिंकिंग और अन्य प्रक्रियाओं में मदद करेंगे। ये असिस्टेंट्स निर्धारित शुल्क पर सेवाएं प्रदान करेंगे, जिससे बुजुर्ग पेंशनभोगियों को बार-बार कार्यालय आने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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