रुपये की रक्षा में RBI का बड़ा कदम, अमेरिकी ट्रेज़री होल्डिंग पाँच साल के निचले स्तर पर

रुपये की रक्षा में RBI का बड़ा कदम, अमेरिकी ट्रेज़री होल्डिंग पाँच साल के निचले स्तर पर

रुपये पर बढ़ते दबाव के बीच भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपनी अमेरिकी ट्रेज़री होल्डिंग घटाकर 174 अरब डॉलर कर दी है, जो पिछले पाँच वर्षों का सबसे निचला स्तर है। यह स्तर 2023 के उच्चतम बिंदु से लगभग 26 प्रतिशत कम है। RBI ने रुपये को रिकॉर्ड निचले स्तरों लगभग 91.8 रुपये प्रति डॉलर के पास स्थिर रखने के लिए बाज़ार में डॉलर की बिक्री की है।

हालांकि ट्रेज़री होल्डिंग में कटौती के बावजूद भारत की कुल विदेशी मुद्रा भंडार स्थिति मज़बूत बनी हुई है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, कुल फॉरेक्स रिज़र्व 701.4 अरब डॉलर पर है। इस दौरान सोने का भंडार बढ़कर 117.5 अरब डॉलर हो गया है, जिसमें 880 मीट्रिक टन सोना शामिल है। इससे साफ है कि RBI अपने रिज़र्व पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहा है।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह कदम डॉलर से दूरी बनाने का संकेत नहीं, बल्कि जोखिम प्रबंधन की रणनीति है। वैश्विक स्तर पर व्यापार तनाव, अमेरिकी टैरिफ और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच केंद्रीय बैंक अपने भंडार को अधिक संतुलित बना रहे हैं। इसी कड़ी में दुनिया भर के केंद्रीय बैंक रिकॉर्ड मात्रा में सोने की खरीद कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, RBI की यह नीति रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने और बाहरी झटकों से अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने की दिशा में एक संतुलित और व्यावहारिक कदम है। आने वाले महीनों में वैश्विक वित्तीय हालात और डॉलर की चाल के आधार पर रिज़र्व प्रबंधन में और बदलाव देखे जा सकते हैं।

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