बोत्सवाना से एयरलिफ्ट कर लाए गए नौ चीते 28 फरवरी को मध्य प्रदेश के Kuno National Park पहुंचे और उन्हें क्वारंटीन बाड़े में छोड़ा गया। इसके साथ ही पुनर्वास कार्यक्रम के तहत भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 48 हो गई है।
केंद्रीय वन मंत्री Bhupender Yadav ने छह मादा और तीन नर चीतों को बाड़े में छोड़ा। यह जानकारी मध्य प्रदेश के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एल. कृष्णमूर्ति ने दी।
अफ्रीका से चीतों का यह तीसरा दल भारतीय वायुसेना के विमान के जरिए भारत पहुंचा। जिला जनसंपर्क अधिकारी अवंतिका श्रीवास्तव ने बताया कि चीतों को बोत्सवाना से ग्वालियर तक वायुसेना के विमान से लाया गया और फिर हेलीकॉप्टर के माध्यम से कुनो पहुंचाया गया।
भारतीय वायुसेना इस पुनर्वास कार्यक्रम की शुरुआत से ही सहयोग कर रही है। इससे पहले सितंबर 2022 में नामीबिया और फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से भी चीतों को लाया गया था, जैसा कि प्रोजेक्ट चीता के निदेशक उत्तम शर्मा ने बताया।
शर्मा ने कहा, “अधिक चीतों के आगमन से पुनर्वास कार्यक्रम को मजबूती मिलेगी। केंद्र सरकार के सहयोग से हम जल्द ही संख्या 50 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखते हैं।”
अधिकारियों के अनुसार, तीन चीतों को Gandhi Sagar Wildlife Sanctuary में स्थानांतरित किया गया है, जबकि 36 चीते कुनो में ही हैं। उन्होंने बताया कि लुप्तप्राय जानवरों को आमतौर पर एक ही आवास में नहीं रखा जाता, क्योंकि किसी बीमारी के फैलने से पूरी आबादी के खत्म होने का खतरा रहता है।
दुनिया का सबसे तेज़ भूमि प्राणी चीता लगभग सात दशक पहले भारत में विलुप्त हो गया था। इस महत्वाकांक्षी पुनर्वास परियोजना का उद्देश्य जंगल में एक स्थायी और स्वस्थ आबादी स्थापित करना है।
पिछले वर्ष कुनो में 12 शावकों का जन्म हुआ था, जिनमें से छह (तीन शावकों सहित) जीवित नहीं रह सके। इस वर्ष 7 फरवरी से 18 फरवरी के बीच दो अलग-अलग लिटर में नौ शावकों का जन्म हुआ। 2023 से अब तक कुनो में कुल 39 शावकों का जन्म हुआ है, जिनमें से 27 जीवित हैं।
नामीबिया में जन्मी ज्वाला और आशा, दक्षिण अफ्रीका में जन्मी गामिनी, वीरा और निर्वा तथा भारत में जन्मी मुखी ने पार्क में शावकों को जन्म दिया है, जो भारत के चीता संरक्षण प्रयासों में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
- Log in to post comments