NCM ने नई दिल्ली में ‘आधुनिक भारत में बौद्ध धर्म’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की

NCM ने नई दिल्ली में ‘आधुनिक भारत में बौद्ध धर्म’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की

National Commission for Minorities (NCM) ने 28 फरवरी को नई दिल्ली के स्कोप कॉम्प्लेक्स में “आधुनिक भारत में बौद्ध धर्म: सांस्कृतिक और सामाजिक मार्गों की खोज” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया।

कार्यक्रम में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य एवं संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री George Kurian भी कार्यक्रम में मौजूद थे।

NCM ने नई दिल्ली में ‘आधुनिक भारत में बौद्ध धर्म’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की

आयोग ने चर्चा सत्र के लिए भारतीय जनता पार्टी, सिक्किम के मुख्य सलाहकार श्री त्सेतन ताशी भूटिया को पैनलिस्ट के रूप में आमंत्रित किया।

अपने संबोधन में भूटिया ने समकालीन भारत में Gautama Buddha की शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि करुणा, शांति, सजगता (माइंडफुलनेस) और मध्यम मार्ग जैसे मूल्य सामाजिक सद्भाव और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में आज भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने सिक्किम की बौद्ध विरासत के संरक्षण और बौद्ध अध्ययन के लिए संस्थागत सहयोग मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

NCM ने नई दिल्ली में ‘आधुनिक भारत में बौद्ध धर्म’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की

उन्होंने युवाओं से भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े रहने का आह्वान करते हुए कहा कि बौद्ध मूल्यों का ‘विकसित भारत @2047’ के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान है।

पैनल चर्चा में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री नीरज कुमार, दिल्ली स्थित वरिष्ठ महायान बौद्ध भिक्षु आचार्य श्री येशी फुंटसोक, हिमाचल प्रदेश के द्रुक ड्रिलबुरी ननरी से सुश्री जिग्मे यूड्रोन ल्हामो, कुशीनगर के भदंत ज्ञानेश्वर बुद्ध विहार के श्री महेंद्र बंते, बोधगया स्थित मगध विश्वविद्यालय के पूर्व इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष सिन्हा तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर संजीव कुमार एच.एम. सहित कई विद्वानों और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।

NCM ने नई दिल्ली में ‘आधुनिक भारत में बौद्ध धर्म’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की

वक्ताओं ने वर्तमान भारत में बौद्ध धर्म के सांस्कृतिक, सामाजिक और शैक्षणिक आयामों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान आयोग ने सभी विशेष आमंत्रित अतिथियों को सम्मानित किया।

संगोष्ठी में बुद्ध की भूमि के रूप में भारत की ऐतिहासिक विरासत को रेखांकित किया गया तथा बौद्ध अध्ययन को सशक्त बनाने, प्राचीन भाषाओं के संरक्षण और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बौद्ध धरोहर के प्रचार-प्रसार के उपायों पर चर्चा की गई।

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