मणिपुर बाल अधिकार आयोग ने निजी स्कूलों में RTE उल्लंघन पर जताई गंभीर चिंता

मणिपुर बाल अधिकार आयोग ने निजी स्कूलों में RTE उल्लंघन पर जताई गंभीर चिंता

Manipur Commission for Protection of Child Rights (MCPCR) ने राज्य के कई अनुदानरहित निजी स्कूलों के संचालन में गंभीर अनियमितताएँ पाई हैं। आयोग ने कहा कि ये स्कूल Right of Children to Free and Compulsory Education Act (RTE) के प्रावधानों का उल्लंघन कर रहे हैं।

27 फरवरी को जारी प्रेस विज्ञप्ति में आयोग ने बताया कि कई स्कूलों में निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) का पालन नहीं हो रहा है। कुछ कक्षाओं में एक ही शिक्षक के अधीन 80 से 90 छात्र पढ़ रहे हैं, जो नियमों के खिलाफ है। आयोग ने कहा कि इस तरह की भीड़भाड़ से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है और शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, साथ ही छात्रों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।

आयोग ने यह भी पाया कि कानूनी प्रतिबंध के बावजूद कुछ स्कूलों में शारीरिक दंड और बुलिंग की घटनाएँ सामने आई हैं। रोकथाम और निगरानी तंत्र की कमी के कारण छात्रों में तनाव और भय का माहौल बना हुआ है।

इसके अलावा, कई स्कूलों में काउंसलर नियुक्त नहीं किए गए हैं, जिसे आयोग ने छात्रों के मनोवैज्ञानिक कल्याण के लिए गंभीर कमी बताया। यह कदम National Education Policy (NEP) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप भी नहीं है।

आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि कुछ स्कूलों में अभिभावक/संरक्षक संघों का गठन नहीं किया गया है या उन्हें काम करने की अनुमति नहीं दी गई है, जो RTE और Central Board of Secondary Education (CBSE) के दिशा-निर्देशों के खिलाफ है।

रिपोर्ट में मनमाने ढंग से ट्रांसफर सर्टिफिकेट जारी करने और बिना काउंसलिंग या सुधारात्मक उपायों के छात्रों को निलंबित करने के मामले भी सामने आए हैं। कुछ संस्थानों में शिक्षकों के लिए आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र की भी कमी पाई गई।

आयोग ने सभी स्कूलों को PTR और बुनियादी ढांचे के मानकों का सख्ती से पालन करने, अभिभावक समितियों का गठन सुनिश्चित करने, काउंसलर नियुक्त करने और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि उल्लंघन जारी रहने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और अनुपालन की निगरानी की जाएगी।

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