असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने 17 फरवरी को दावा किया कि वर्ष 2014 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की तारीख तय करने के लिए कहा था, जब 58 विधायक उनके समर्थन में थे।
राज्य विधानसभा में कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में सरमा ने कहा कि यह योजना बाद में साकार नहीं हो पाई क्योंकि राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद परिस्थितियां बदल गईं। उस समय राहुल गांधी विदेश में थे।
सरमा ने कहा, “मैडम (सोनिया गांधी), जिन्हें मैं आज भी इसी नाम से संबोधित करता हूं, उन्होंने मुझसे तारीख तय करने को कहा था। मैंने उन्हें बताया था कि मैं जून 2014 में कामाख्या मंदिर में अंबुबाची मेले के बाद शपथ लूंगा।”
उनके अनुसार, इसके बाद राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं को फोन किए, जिससे राज्य इकाई के भीतर घटनाक्रम बदल गया। हालांकि उन्होंने बातचीत के विवरण का खुलासा नहीं किया।
2011 विधानसभा चुनाव के बाद असम कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ गया था और कुछ विधायक तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की जगह सरमा को मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में थे। नेतृत्व का मुद्दा अनसुलझा रहा और अंततः सरमा ने 2015 में कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) जॉइन कर ली।
उस दौर को याद करते हुए सरमा ने कहा, “मुझे तब दुख हुआ था, लेकिन अब मुझे लगता है कि जीवन में जो होता है, अच्छे के लिए होता है। भगवान ने मुझे उससे कहीं ज्यादा दिया, जितना मुझे कांग्रेस में रहकर मिलता।”
उन्होंने कहा कि BJP के मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें असम और सनातन धर्म की सेवा करने का अवसर मिला, जो कांग्रेस में संभव नहीं होता।
2021 से मुख्यमंत्री पद संभाल रहे सरमा ने यह भी संकेत दिया कि यदि वह कभी किताब लिखेंगे तो उस समय के घटनाक्रम के और विवरण सामने ला सकते हैं।
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