भूपेन बोरा ने कांग्रेस से अपने इस्तीफे को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि वह किसी कमजोर “APCC-R” धड़े के साथ नहीं रहेंगे और उनकी निष्ठा केवल असली कांग्रेस के प्रति है, अन्यथा कुछ भी नहीं।
16 फरवरी को इस्तीफा देने के बाद बोरा ने कहा कि अगर वरिष्ठ नेता प्रद्युत बोर्डोलोई और विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया एक बार उन्हें बुलाकर पार्टी की अखंडता का भरोसा दिलाते हैं, तो वह वापस आने के लिए तैयार हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी “सच्ची APCC” रहनी चाहिए, किसी समझौते से कमजोर हुई “APCC-R” नहीं।
बोरा ने अपनी राजनीतिक रणनीति पर पछतावा जताते हुए स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी चालों से AIUDF को “खत्म” कर दिया और गठबंधन तोड़कर अखिल गोगोई, लुरिनज्योति गोगोई, CPI(M) सहित अन्य दलों के साथ गए। लेकिन उन्होंने कहा कि भगवद गीता के कर्म सिद्धांत की तरह - “जैसा बोओगे वैसा काटोगे” - यह जीत उल्टा पड़ गई और कांग्रेस “APCC-R” में बदल गई।
उन्होंने पंचायत चुनावों के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए पहलगाम आतंकी हमले का मुद्दा उठाया, जहां उन्होंने पाकिस्तान से कड़ा बदला लेने की मांग की थी। इस पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कांग्रेस को “पाकिस्तानी समर्थकों का ठिकाना” बताया और यहां तक संकेत दिया कि गौरव गोगोई को गिरफ्तार किया जा सकता है।
बोरा ने कहा, “जोरहाट और तिताबर के नतीजे बहुत कुछ कहते हैं - राजनीति में सबूत नहीं, धारणा मायने रखती है।” चुनावों के बाद खुद को उन्होंने “शहीद” बताया, जिसे विपक्षी नेताओं पर हमलों के बीच बलि का बकरा बनाया गया।
फिलहाल बोरा ने किसी दूसरी पार्टी में जाने से इनकार किया है और कहा कि वह उस निर्णायक बुलावे का इंतजार करेंगे, साथ ही कांग्रेस से अपनी राष्ट्रवादी पहचान फिर से मजबूत करने की अपील की।
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