संयुक्त बजट 2026 1 फरवरी को पेश किया जाएगा, और कर सुधारों (Tax Reforms) को सरकार की प्रमुख प्राथमिकता माना जा रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कई करदाता‑अनुकूल उपायों की घोषणा कर सकती हैं, जो पिछले कुछ वर्षों में अपनाए गए रुझान को जारी रखेंगे। कई विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी बजट कर अनुपालन को सरल बनाने और देश की कर व्यवस्था को मजबूत करने वाले राहत उपाय ला सकता है।
पिछला संयुक्त बजट करदाताओं के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ था। वित्त मंत्री ने व्यक्तिगत आय पर कर छूट की घोषणा की थी, यदि वार्षिक आय ₹12 लाख तक हो। इससे बड़ी संख्या में करदाता लाभान्वित हुए।
पहले के बजटों ने भी महत्वपूर्ण सुधार किए। संयुक्त बजट 2024 में सरकार ने पूंजीगत लाभ (Capital Gains) कर प्रणाली में बदलाव किया और निवेशकों को राहत दी। इसके पहले, संयुक्त बजट 2020 ने नई आयकर व्यवस्था (New Income Tax Regime) की शुरुआत की। इसे और आकर्षक बनाने के लिए सरकार ने बाद में ₹75,000 का मानक कटौती (Standard Deduction) जोड़ दिया।
इस बार क्रिप्टोकरेंसी निवेशक (Cryptocurrency Investors) भी ध्यान से बजट का इंतजार कर रहे हैं। कर विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार क्रिप्टो उद्योग और निवेशकों की लंबित मांगों पर विचार कर सकती है।
वर्तमान में भारत में कोई क्रिप्टोकरेंसी इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है और लोग अपने जोखिम पर ट्रेड कर रहे हैं। संयुक्त बजट 2022 में क्रिप्टो को कर नेटवर्क में लाया गया। उस समय, सरकार ने वर्चुअल डिजिटल असेट्स (VDAs) लेन-देन पर 1% TDS और क्रिप्टो निवेश पर 30% फ्लैट टैक्स लागू किया। तब से उद्योग के हितधारकों ने कई बार आपत्तियां जताई और मांगें प्रस्तुत की हैं। विशेषज्ञ उम्मीद करते हैं कि बजट 2026 में क्रिप्टो निवेशकों के लिए किसी तरह की कर राहत दी जा सकती है।
एक और महत्वपूर्ण फोकस लॉन्ग‑टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) पर हो सकता है, खासकर स्टॉक्स और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर। संयुक्त बजट 2024 में सरकार ने करमुक्त LTCG की सीमा ₹1.25 लाख प्रति वित्तीय वर्ष कर दी थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी बजट 2026 में इसे ₹2 लाख तक बढ़ाया जा सकता है, जिससे अधिक लोग इक्विटी मार्केट और म्यूचुअल फंड स्कीम्स में निवेश करेंगे।
नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत बेसिक छूट सीमा वर्तमान में ₹4,00,000 है, यानी इस राशि तक की वार्षिक आय पर कोई कर नहीं लगता। कई कर विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार इसे ₹5,00,000 तक बढ़ा सकती है, जिससे कम आय वाले करदाताओं को सीधी राहत मिलेगी और नई कर व्यवस्था और आकर्षक बनेगी।
एक और महत्वपूर्ण संभावना है कि बीमा से संबंधित कटौतियों (Insurance-related Deductions) को नई कर व्यवस्था में शामिल किया जाए। वर्तमान में, धारा 80C के तहत टर्म लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम और धारा 80D के तहत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम केवल पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) में उपलब्ध हैं।
कर विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार इन कटौतियों को नई कर व्यवस्था में भी लागू कर सकती है।
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