भारत की पहली महिला शिक्षिका, सावित्रीबाई फुले जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन

 सावित्रीबाई फुले जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन

भारत की पहली महिला शिक्षिका और महान समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले जी की जयंती पर देशभर में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। महिला शिक्षा को सशक्तिकरण का सबसे मजबूत माध्यम बनाने और वंचित-शोषित वर्ग को समान अधिकार दिलाने के लिए उनके अतुलनीय योगदान को राष्ट्र ने नमन किया।

भारतीय इतिहास में सामाजिक क्रांति की अग्रदूत मानी जाने वाली सावित्रीबाई फुले ने वर्ष 1848 में पुणे में देश का पहला बालिका विद्यालय स्थापित किया, जिससे महिला शिक्षा की नींव पड़ी। उस दौर में जब समाज में महिलाओं को पढ़ने का अधिकार तक नहीं था, तब उन्होंने शिक्षा की लौ जलाकर सामाजिक बदलाव की शुरुआत की।

सावित्रीबाई फुले ने न केवल महिलाओं के लिए शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया, बल्कि जातिगत भेदभाव, महिलाओं पर अत्याचार और सामाजिक असमानता के खिलाफ भी आजीवन संघर्ष किया। उनका आंदोलन आज भी सामाजिक न्याय और समानता की लड़ाई का सबसे बड़ा प्रेरणा-स्रोत माना जाता है।

इस अवसर पर देशभर के शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और सरकारी कार्यक्रमों में उनके विचारों और संघर्ष को याद करते हुए संगोष्ठियां, श्रद्धांजलि सभाएं और जागरूकता अभियान आयोजित किए गए। नेताओं, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय की दिशा में सावित्रीबाई फुले द्वारा किए गए कार्य आने वाली पीढ़ियों को निरंतर मार्गदर्शन देते रहेंगे।

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