केंद्र सरकार ने केंद्र शासित प्रदेशों (Union Territories) के लेफ्टिनेंट गवर्नरों (LGs) को वित्तीय शक्तियाँ पुनः बहाल कर दी हैं, जिनके तहत वे विकास परियोजनाओं को सीधे मंज़ूरी दे सकेंगे जिसकी अनुमानित लागत ₹100 करोड़ तक है। इससे UTs में परियोजनाओं की मंज़ूरी प्रक्रिया को तेज़ करने और स्थानीय विकास को बढ़ावा देने की दिशा में अहम प्रशासनिक बदलाव आया है।
मोदी सरकार की इस नई व्यवस्था के तहत लद्दाख, आंधमान–निकोबार द्वीप समूह, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव, और लक्षद्वीप जैसे UTs में LG/प्रशासनिक अधिकारियों को यह अधिकार मिला है कि वे पूर्व में केंद्र की मंज़ूरी के बिना ₹100 करोड़ तक की परियोजनाओं को मंज़ूर कर सकेंगे। इससे परियोजना प्राधिकरण में गति आएगी और स्थानीय प्रशासन को अधिक निर्णय लेने की क्षमता मिलेगी।
आधिकारिक आदेश के अनुसार यह शक्ति Delegation of Financial Powers Rules (DFPRs), 2024 के अंतर्गत दी गई है और इस निर्णय से पहले सितंबर 2025 में कुछ वित्तीय अधिकारों को सीमित कर दिया गया था, जिसे अब वापस लिया गया है।
इसके साथ यह भी सुनिश्चित किया गया है कि परियोजनाओं की स्वीकृतियाँ बजटीय प्रावधानों और वित्त विभाग के साथ परामर्श के बाद दी जाएँ और मंज़ूर की गई परियोजनाओं की त्रैमासिक रिपोर्ट केंद्र को दी जाये।
इस फैसले का मकसद यह है कि UTs में नीति कार्यान्वयन की प्रक्रिया तेज़, सरल और अधिक स्थानीय स्तर पर निर्णय आधारित हो, ताकि विकास के कार्य समय पर और बेहतर तरीके से पूरे हो सकें।
- Log in to post comments