अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की अप्रैल में चीन यात्रा और चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के साथ होने वाली शिखर वार्ता भले ही भव्य होने की उम्मीद है, लेकिन व्यापार विवाद, ताइवान और तकनीक से जुड़े मतभेद इस मुलाकात की गर्मजोशी को प्रभावित कर सकते हैं।
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार ट्रंप 31 मार्च को तीन दिन की चीन यात्रा पर रवाना होंगे। हालांकि चीन सरकार, जो आमतौर पर बड़े दौरों की पुष्टि देर से करती है, ने अभी तक तारीखों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। ट्रंप पहले ही अपनी यात्रा को लेकर उत्साहित दिखे हैं। उन्होंने कहा, “मेरा राष्ट्रपति शी के साथ बहुत अच्छा रिश्ता है… यह इतिहास का सबसे बड़ा प्रदर्शन होगा।”
ट्रंप ने 2017 में बीजिंग की अपनी पिछली यात्रा का जिक्र करते हुए वहां की सैन्य परेड की भी तारीफ की। विश्लेषकों का मानना है कि चीन ट्रंप के भव्य स्वागत के जरिए वैश्विक संदेश देना चाहता है, खासकर एशियाई देशों को, कि उसने अमेरिका के साथ प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत की है।
हालांकि दोनों देशों के बीच कई विवाद ऐसे हैं जो शिखर वार्ता को प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के कुछ टैरिफ को अवैध घोषित करने के फैसले से वार्ता से पहले उनकी सौदेबाजी की स्थिति कमजोर हो सकती है। ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि वह नए कानूनी आधार पर टैरिफ जारी रखेगा और पहले ही 15% का नया आयात कर घोषित किया जा चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानूनी झटका चीन को वार्ता में अधिक आत्मविश्वास दे सकता है। ट्रंप का मुख्य फोकस व्यापार और निवेश समझौतों को आगे बढ़ाने पर रहेगा, जबकि अमेरिका ने चीन से दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ) की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने का भी दबाव बनाया है।
चीन की प्राथमिकता अमेरिका के साथ संबंधों में स्थिरता हासिल करना हो सकती है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है और सेना में भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई भी जारी है। विश्लेषकों का कहना है कि शी जिनपिंग को अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और दीर्घकालिक विकास के रास्ते पर लाने के लिए समय चाहिए।
वार्ता में चीन अमेरिकी तकनीकी प्रतिबंधों और निवेश नियमों में रियायतें भी चाहता है। वहीं सबसे बड़ा मुद्दा ताइवान हो सकता है। चीन चाहता है कि अमेरिका ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन न करने की स्पष्ट बात दोहराए। ताइवान के राष्ट्रपति Lai Ching-te ने कहा है कि द्वीप वास्तविक रूप से पहले ही स्वतंत्र है, हालांकि औपचारिक स्वतंत्रता की घोषणा से उन्होंने परहेज किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ट्रंप ताइवान को नए हथियार पैकेज की मंजूरी देते हैं, तो इससे संबंध फिर बिगड़ सकते हैं और शिखर वार्ता भी प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा, यदि ट्रंप सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए टैरिफ को नए कानूनी आधार पर फिर लागू करते हैं, तो चीन जवाबी कदम के तौर पर अमेरिका से कृषि उत्पादों की खरीद कम कर सकता है।
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