व्यापार विवादों और टैरिफ दबावों के बीच अमेरिका ने एक बार फिर वैश्विक रणनीति में भारत की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित किया है। भारत में अमेरिकी राजदूत नामित सर्जियो गोर ने स्पष्ट किया कि मौजूदा चुनौतियों के बावजूद नई दिल्ली वाशिंगटन की सबसे अहम साझेदारों में से एक बनी हुई है। उन्होंने संवेदनशील समय में द्विपक्षीय रिश्तों की गहराई पर जोर दिया।
टैरिफ और ऊर्जा व्यापार को लेकर बढ़ी निगरानी के बीच गोर ने भारत को अमेरिका के लिए “अत्यंत आवश्यक” बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संवाद लगातार जारी है। पदभार संभालने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने आत्मविश्वासी और सौहार्दपूर्ण लहजे में कहा, “भारत से अधिक आवश्यक कोई साझेदार नहीं है।” उनके ये बयान ऐसे समय आए हैं जब अमेरिका और भारत टैरिफ तथा वैश्विक ऊर्जा बाजारों से जुड़ी जटिल आर्थिक-भूराजनीतिक परिस्थितियों से गुजर रहे हैं।
भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में कार्यभार संभालने के बाद सर्जियो गोर ने कहा, “मैं राष्ट्रपति ट्रंप के साथ दुनिया भर में यात्रा कर चुका हूं और मैं यह प्रमाणित कर सकता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी दोस्ती वास्तविक है। अमेरिका और भारत केवल साझा हितों से ही नहीं, बल्कि…।”
सर्जियो गोर ने सोमवार को औपचारिक रूप से भारत में अमेरिकी राजदूत का पद संभाला। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह इस सप्ताह के अंत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपने राजनयिक प्रमाण-पत्र (क्रेडेंशियल्स) सौंप सकते हैं।

गोर अक्टूबर 2025 में नई दिल्ली पहुंचे थे, जब उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नामित किया था। उन्होंने एरिक गार्सेटी का स्थान लिया है ऐसे समय में जब अमेरिका-भारत संबंध वैश्विक स्तर पर विशेष महत्व रखते हैं।
अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में गोर ने इस साझेदारी के प्रतीकात्मक और रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “यहां अमेरिका का राजदूत बनकर आना मेरे लिए गर्व की बात है। मैं इस अद्भुत देश में गहरे सम्मान और एक स्पष्ट मिशन के साथ आया हूं हमारे दोनों महान देशों के बीच साझेदारी को अगले स्तर तक ले जाना। यह दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का संगम है।”
उनकी टिप्पणियां साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर रिश्तों को मजबूत करने की कोशिश को दर्शाती हैं, भले ही नीतिगत मतभेद अभी पूरी तरह सुलझे न हों।
राजदूत के ये बयान ऐसे समय आए हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बयानबाज़ी तेज हुई है। पिछले सप्ताह ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि रूस से तेल खरीद जारी रखने के कारण भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जा सकते हैं।
एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “अच्छा आदमी” बताया, लेकिन असंतोष भी जताया। उन्होंने कहा, “उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं था, और मुझे खुश करना महत्वपूर्ण था।” ट्रंप ने जोड़ा कि रूस के साथ भारत का व्यापार त्वरित टैरिफ बढ़ोतरी को ट्रिगर कर सकता है।
इन टिप्पणियों के कुछ दिन बाद ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंधों से जुड़ा एक विधेयक मंजूर किया, जिसमें मॉस्को और उससे व्यापार करने वाले देशों पर कड़े दंड का प्रस्ताव है। इस विधेयक में रूस और रूसी तेल, पेट्रोलियम उत्पादों व यूरेनियम का आयात करने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने के प्रावधान शामिल हैं।
वर्तमान में भारत पर अमेरिका द्वारा 50 प्रतिशत टैरिफ लागू है। इसमें शुरुआती 25 प्रतिशत टैरिफ और उसके बाद ट्रंप की ‘लिबरेशन डे’ घोषणा के महीनों बाद घोषित अतिरिक्त 25 प्रतिशत शामिल हैं। दूसरे बढ़ोतरी को अमेरिका ने रूस से तेल खरीद के जरिए “यूक्रेन युद्ध को ईंधन देने” के आरोप से जोड़ा है।
हालांकि यह प्रतिबंध विधेयक अभी पारित नहीं हुआ है, लेकिन इसके प्रभाव व्यापक हो सकते हैं। यदि यह कानून बनता है, तो इसके तहत राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों से अमेरिका में आयात होने वाले सभी सामानों और सेवाओं पर कम से कम 500 प्रतिशत टैरिफ लगाना होगा, जो जानबूझकर रूसी मूल के यूरेनियम और पेट्रोलियम उत्पादों का व्यापार करते हैं।
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