असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर प्रस्तावित ढांचे को लेकर निलंबित टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इस प्रस्ताव को राजनीतिक रूप से प्रेरित और केवल प्रतीकात्मक बताया।
मिर्जापुर में पत्रकारों से बात करते हुए सरमा ने कहा कि प्रस्तावित ढांचा सिर्फ एक “पुतला” (डमी) होगा। उन्होंने कहा, “यह बाबरी मस्जिद का पुतला है, असली नहीं। जब असली ही नहीं रहा तो पुतला क्या करेगा?”
कबीर, जिन्हें तृणमूल कांग्रेस से हटाए जाने के बाद उन्होंने जनता उन्नयन पार्टी बनाई, ने हाल ही में मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में निर्माण कार्य शुरू किया। प्रस्तावित मस्जिद रेजीनगर में बनाई जाएगी, जिसे लगभग दो वर्षों में 50-55 करोड़ रुपये की लागत से पूरा करने का लक्ष्य है।
कबीर के अनुसार, यह परियोजना 11 एकड़ भूमि पर बनेगी और इसमें लगभग 12,000 लोगों के नमाज पढ़ने की क्षमता होगी। उन्होंने इसे एक बड़ा धार्मिक और सामुदायिक पहल बताया है।
इस घोषणा पर दक्षिणपंथी संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने लोगों से विरोध के लिए उत्तर प्रदेश से मुर्शिदाबाद तक मार्च करने का आह्वान किया, जिससे संभावित सांप्रदायिक तनाव को लेकर चिंता बढ़ गई है।
अयोध्या में स्थित मूल बाबरी मस्जिद को 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों की भीड़ ने ढहा दिया था, जिसके बाद देशभर में अशांति फैल गई थी। इस विवाद पर 9 नवंबर 2019 को भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किया और मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का निर्देश दिया।
फैसले के बाद अयोध्या में अयोध्या में एक ट्रस्ट के माध्यम से राम मंदिर का निर्माण किया गया, जिससे देश के सबसे लंबे कानूनी और राजनीतिक विवादों में से एक का औपचारिक समापन हुआ।
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