परमाणु हथियारों की नई दौड़? रूस-अमेरिका के बीच NEW START संधि खत्म, दुनिया के सामने बढ़ता खतरा

परमाणु हथियारों की नई दौड़? रूस-अमेरिका के बीच NEW START संधि खत्म, दुनिया के सामने बढ़ता खतरा

रूस और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों को सीमित रखने वाली अहम NEW START (New Strategic Arms Reduction Treaty) संधि 5 फरवरी को औपचारिक रूप से समाप्त हो गई। इसके साथ ही करीब पांच दशकों से चली आ रही परमाणु हथियार नियंत्रण की व्यवस्था भी कमजोर पड़ गई है, जिससे वैश्विक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

यह द्विपक्षीय संधि वर्ष 2011 से लागू थी और इसके तहत दोनों देशों को अधिकतम 1550 परमाणु वारहेड्स, 700 लॉन्चर और 800 तैनात लॉन्चर तक सीमित रहने की अनुमति थी। अब संधि खत्म होने के बाद रूस और अमेरिका पर परमाणु हथियारों की संख्या और तैनाती को लेकर कोई कानूनी बाध्यता नहीं रह गई है।

हालांकि, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सितंबर 2025 में इस संधि को एक साल के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन अमेरिका की ओर से इस पर कोई औपचारिक सहमति नहीं दी गई। अमेरिकी पक्ष का मानना रहा है कि मौजूदा वैश्विक हालात में, खासकर जब चीन इस समझौते का हिस्सा नहीं है, तो यह संधि प्रभावी नहीं रह गई है। वहीं रूस ने भी संधि की सीमाओं को मानने से इनकार कर दिया, जिससे परमाणु हथियारों की नई होड़ शुरू होने का खतरा बढ़ गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, NEW START के खत्म होने के बाद करीब 50 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है जब दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों पर हथियार नियंत्रण का कोई औपचारिक बंधन नहीं है। इसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती माना जा रहा है।

इस संधि पर 8 अप्रैल 2010 को प्राग में हस्ताक्षर हुए थे और इसे 5 फरवरी 2011 को लागू किया गया था। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने इस पर दस्तखत किए थे। संधि का उद्देश्य उन रणनीतिक परमाणु हथियारों की तैनाती को सीमित करना था, जो किसी देश के सैन्य, राजनीतिक और औद्योगिक ढांचे को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं।

रूस और अमेरिका के बीच परमाणु हथियार नियंत्रण को लेकर बातचीत 1970 के दशक में शीत युद्ध के दौरान शुरू हुई थी। SALT समझौते के बाद 1991 में START-I और 1993 में START-II संधि हुई, हालांकि सभी प्रावधानों को पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका। बाद में 2002 में SORT और फिर 2010 में NEW START संधि अस्तित्व में आई, जिसे 2021 में पांच साल का विस्तार भी मिला था।

रूस और अमेरिका के पास मिलकर दुनिया के 90 प्रतिशत से अधिक परमाणु हथियार हैं। जनवरी 2025 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, रूस के पास लगभग 4300 से अधिक और अमेरिका के पास करीब 3700 परमाणु वारहेड्स थे। तुलना करें तो फ्रांस, ब्रिटेन और चीन के पास इससे कहीं कम संख्या में परमाणु हथियार हैं।

NEW START के खत्म होने के साथ ही अब सवाल यह है कि क्या परमाणु हथियारों पर नियंत्रण की कोई नई वैश्विक पहल सामने आएगी, या दुनिया एक बार फिर अनियंत्रित परमाणु प्रतिस्पर्धा की ओर बढ़ेगी।

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