सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को लद्दाख में हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। उनके खिलाफ NSA की धाराएं लगाई गईं। उनकी पत्नी गीतांजलि ने सुप्रीम कोर्ट में इस हिरासत को चुनौती दी।
गीतांजलि की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा कि पुलिस ने हिरासत के आधार बताने में 28 दिनों की देरी की, जो कानून के स्पष्ट उल्लंघन में आता है।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सोनम वांगचुक का भाषण पूरी तरह शांतिपूर्ण था और उसे हिंसा से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
सिब्बल ने चौरी-चौरा कांड और महात्मा गांधी के सत्याग्रह का उदाहरण देते हुए कहा कि वांगचुक ने भी अपने आंदोलन में अहिंसा और शांतिपूर्ण विरोध का मार्ग अपनाया।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि वांगचुक और उनके संगठन ने भूख हड़ताल का निर्णय लिया, लेकिन किसी को नुकसान नहीं पहुँचाया। उनका संदेश लोकतांत्रिक तरीकों और शांति पर आधारित था।
सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।
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