कश्मीर में खाद्य विवाद के बीच उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने गैर-शाकाहारी भोजन के अधिकार का किया समर्थन

कश्मीर में खाद्य विवाद के बीच उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने गैर-शाकाहारी भोजन के अधिकार का किया समर्थन

खाद्य आदतों को लेकर देश में समय-समय पर उठने वाले विवादों के बीच उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan ने कश्मीर दौरे के दौरान गैर-शाकाहारी भोजन के अधिकार का खुलकर समर्थन किया। कश्मीर विश्वविद्यालय के 21वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक समाज में लोगों की भोजन संबंधी पसंद का सम्मान किया जाना चाहिए।

उन्होंने अपने झारखंड के राज्यपाल कार्यकाल का एक प्रसंग याद करते हुए बताया कि ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के तहत जम्मू-कश्मीर से आए छात्रों के लिए राजभवन में उनकी पसंद के अनुसार भोजन की व्यवस्था की गई थी। उन्होंने कहा कि वह स्वयं शाकाहारी हैं, लेकिन उन्होंने अधिकारियों से कहा था कि छात्रों को उनकी पसंद का गैर-शाकाहारी भोजन परोसा जाए।

उपराष्ट्रपति ने कहा, “हम लोकतंत्र में विश्वास करते हैं। हमें अपने विचारों पर गर्व हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम दूसरों की भावनाओं या पसंद को कमतर समझें।” उनके बयान को उन आवाज़ों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है जो गैर-शाकाहारी भोजन पर प्रतिबंध की मांग करती रही हैं।

हाल ही में फिल्म The Kerala Story 2: Goes Beyond के ट्रेलर को लेकर भी विवाद हुआ, जिसमें एक दृश्य में हिंदू लड़की को जबरन बीफ खिलाते दिखाया गया। इसके बाद केरल के मंत्री V. Sivankutty की सोशल मीडिया टिप्पणी ने बहस को और तेज कर दिया।

कश्मीर में विभिन्न समुदाय मुस्लिम, पंडित और सिख पारंपरिक रूप से मांसाहारी व्यंजनों का आनंद लेते रहे हैं। यहां का प्रसिद्ध ‘वाज़वान’ बहु-कोर्स मांसाहारी भोज के लिए जाना जाता है। ऐसे में खान-पान पर किसी भी प्रकार के प्रतिबंध को सांस्कृतिक हस्तक्षेप के रूप में देखा जाता है।

इससे पहले 2021 में फिल्म निर्माता Vivek Agnihotri ने अपनी फिल्म The Kashmir Files की शूटिंग के दौरान “शाकाहारी वाज़वान” को लेकर सोशल मीडिया पर टिप्पणी की थी, जिसे लेकर भी विवाद खड़ा हो गया था।

विश्लेषकों का मानना है कि उपराष्ट्रपति का यह बयान विविधता और सांस्कृतिक सह-अस्तित्व के पक्ष में एक स्पष्ट संदेश है।

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