असम कृषि विश्वविद्यालय की पहल: सोयाबीन खेती से पोषण और पशु-आहार सुरक्षा को मिलेगा बल

असम कृषि विश्वविद्यालय की पहल: सोयाबीन खेती से पोषण और पशु-आहार सुरक्षा को मिलेगा बल

Assam Agricultural University में असम में सोयाबीन खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित दस दिवसीय सघन क्षमता-विकास कार्यक्रम संपन्न हुआ। विशेषज्ञों ने कहा कि यह तिलहन फसल राज्य की पोषण तथा पशु-आहार सुरक्षा प्रणाली की आधारशिला बन सकती है।

“असम में पोषण, फीड और खाद्य सुरक्षा के लिए सोयाबीन खेती को सुदृढ़ करना” शीर्षक से आयोजित इस पहल में किसानों, वैज्ञानिकों और उद्योग से जुड़े हितधारकों को एक मंच पर लाया गया। 16 से 25 फरवरी तक आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट (AICRP) ऑन सोयाबीन द्वारा किया गया। इसमें कार्बी आंगलोंग, उदालगुड़ी, तिनसुकिया, धेमाजी, मंगलदई, जोरहाट और गोलाघाट सहित विभिन्न जिलों की किसान उत्पादक कंपनियों (FPCs) के किसानों ने भाग लिया।

उद्घाटन सत्र में डॉ. मृणाल सैकिया, डॉ. किशोर कुमार शर्मा, डॉ. आई.ए. शेख और सुबीर चट्टोपाध्याय उपस्थित रहे, जिससे कार्यक्रम के अकादमिक और उद्योग आधारित दृष्टिकोण को बल मिला।

डॉ. सैकिया ने कहा कि सोयाबीन बहुउद्देश्यीय फसल के रूप में खाद्य, पशु-आहार और आजीविका सुरक्षा को मजबूत करने की क्षमता रखती है। उन्होंने बदलती जलवायु और बाजार परिस्थितियों के बीच उच्च-मूल्य तिलहन फसलों की ओर विविधीकरण को असम की कृषि मजबूती के लिए आवश्यक बताया।

AICRP ऑन सोयाबीन के प्रधान अन्वेषक और कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रूपम बरगोहाईं ने बताया कि राज्य में सोयाबीन एक महत्वपूर्ण तिलहन फसल के रूप में उभर रही है। बिश्वनाथ चरियाली में सोयाबीन तेल मिल और जोरहाट में फीड मिल की स्थापना से मूल्य श्रृंखला मजबूत हुई है और किसानों के लिए विपणन के अवसर बढ़े हैं।

कार्यक्रम की आयोजन सचिव डॉ. मुनमी बोरा ने किसानों से वैज्ञानिक खेती पद्धतियां अपनाने की अपील की, जिससे उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि हो सके। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीक और FPC के माध्यम से सामूहिक विपणन से लाभप्रदता बढ़ेगी और कटाई के बाद होने वाले नुकसान कम होंगे।

प्रशिक्षण सत्रों में वैज्ञानिक खेती, कीट एवं रोग प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, कटाई के बाद प्रसंस्करण, सोयाबीन आधारित खाद्य उत्पाद निर्माण और बाजार संपर्क रणनीतियों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने हैंड्स-ऑन डेमो और इंटरैक्टिव मॉड्यूल के जरिए उन्नत तकनीकों को अपनाने में किसानों की मदद की।

उद्योग exposure के तहत प्रतिभागियों ने जोरहाट के क्लब रोड स्थित LAI LESAI FOOD TECH के टोफू उत्पादन इकाई का दौरा भी किया, जहां प्रोपराइटर जाबालिक खाउंड ने मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और बाजार मांग पर जानकारी साझा की।

यह पहल असम में सोयाबीन खेती को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है और वैज्ञानिक अनुसंधान, किसान प्रशिक्षण तथा उद्योग सहयोग को जोड़कर राज्य की पोषण सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की उम्मीद है।

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