त्रिपुरा में कोकबोरोक लिपि विवाद के बीच अमित शाह की अपील-देवनागरी अपनाकर सांस्कृतिक पहचान मजबूत करें

त्रिपुरा में कोकबोरोक लिपि विवाद के बीच अमित शाह की अपील-देवनागरी अपनाकर सांस्कृतिक पहचान मजबूत करें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को त्रिपुरा से देवनागरी लिपि अपनाने की अपील की, ताकि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूती मिल सके। यह बयान ऐसे समय आया है जब टिपरा मोथा पार्टी और अन्य जनजातीय संगठनों की ओर से कोकबोरोक भाषा के लिए रोमन लिपि की मांग उठ रही है।

शाह ने यह बात हापनिया स्थित इंटरनेशनल इंडोर एग्ज़िबिशन सेंटर में आयोजित पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और उत्तरी क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में बांग्ला, कोकबोरोक और हिंदी तीनों भाषाएं समान रूप से बोली जाती हैं और यहां भाषा या लिपि को लेकर कोई बड़ा विवाद नहीं रहा है।

उन्होंने उत्तर-पूर्व के कई प्रसिद्ध व्यक्तित्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि डॉ. भूपेन हजारिका, एस. डी. बर्मन, आर. डी. बर्मन और जुबिन गर्ग जैसे कलाकारों ने हिंदी के माध्यम से क्षेत्र को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है। उन्होंने सभी से देवनागरी को स्वीकार करने और इसी माध्यम से संवाद बढ़ाने की अपील की।

शाह ने कहा कि उत्तर-पूर्व की अधिकांश स्थानीय भाषाओं ने देवनागरी लिपि को अपनाया है और त्रिपुरा को भी अपनी पहचान मजबूत करने के लिए ऐसा करना चाहिए। उन्होंने यह भी जोर दिया कि भाषा और लिपि विवाद का कारण नहीं बल्कि विकास का माध्यम होना चाहिए।

देवनागरी के महत्व पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि इस लिपि को बढ़ावा देने की बात विनोबा भावे ने भी की थी। उनका मानना था कि देवनागरी को विभिन्न बोलियों से जोड़कर देश की हजारों बोलियों को संरक्षित किया जा सकता है।

उत्तर-पूर्व के विकास पर प्रकाश डालते हुए शाह ने कहा कि पहले क्षेत्र में बंद, नाकेबंदी और हिंसा की आवाजें सुनाई देती थीं, लेकिन अब पर्यटन और निवेश तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में भाषाई विविधता को मजबूत करने के लिए उत्तर-पूर्व सबसे उपयुक्त क्षेत्र है, जहां सैकड़ों भाषाएं, समुदाय और समृद्ध परंपराएं मौजूद हैं।

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