केंद्र ने आत्मनिर्भर कंटेनर इकोसिस्टम को दी रफ्तार, भारत कंटेनर शिपिंग लाइन के लिए MoU पर हस्ताक्षर

केंद्र ने आत्मनिर्भर कंटेनर इकोसिस्टम को दी रफ्तार, भारत कंटेनर शिपिंग लाइन के लिए MoU पर हस्ताक्षर

केंद्र सरकार ने मंगलवार, 3 फरवरी को भारत की निर्यात–आयात लॉजिस्टिक्स संरचना को नया आकार देने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाते हुए राष्ट्रीय कंटेनर कैरियर की योजना को औपचारिक रूप दिया। इसके तहत भारत कंटेनर शिपिंग लाइन (BCSL) की स्थापना के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह पहल आत्मनिर्भर भारत के विज़न के तहत कंटेनर शिपिंग, निर्माण और पोर्ट-आधारित लॉजिस्टिक्स को भारत में सुदृढ़ रूप से स्थापित करने के उद्देश्य से की गई है।

यह MoU केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल तथा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की उपस्थिति में संपन्न हुआ, जो शिपिंग, बंदरगाहों और रेल-आधारित लॉजिस्टिक्स के बीच समन्वित, बहु-माध्यमीय प्रयास का संकेत देता है। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर भी उपस्थित थे।

इस समझौते के तहत शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI), कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CONCOR), जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण, वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट प्राधिकरण (VOCPA), चेन्नई पोर्ट प्राधिकरण और सागरमाला फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SMFCL) को पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के तत्वावधान में एक साथ लाया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि BCSL पहल, केंद्रीय बजट 2026–27 में घोषित कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम (CMAS) के अनुरूप है और यह जहाज संचालन, कंटेनर निर्माण और पोर्ट अवसंरचना को समेटते हुए एक पूर्णतः एकीकृत, घरेलू स्वामित्व वाले कंटेनर इकोसिस्टम की ओर बदलाव को दर्शाती है।

इसी क्रम में, वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट, तूतीकोरिन में आउटर हार्बर परियोजना के वित्तपोषण के लिए VOCPA, इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IRFC) और SMFCL के बीच एक अलग त्रिपक्षीय MoU पर भी हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत सागरमाला कार्यक्रम और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत पात्र बंदरगाह क्षमता विस्तार परियोजनाओं के लिए ₹15,000 करोड़ तक के संयुक्त वित्तपोषण का प्रावधान है।

वित्तपोषण ढांचा मुख्य रूप से हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत ब्रेकवाटर निर्माण और उससे जुड़ी ऑनशोर एवं ऑफशोर अवसंरचना के लिए ऋण वित्त पर केंद्रित है, जिससे बड़े पैमाने की समुद्री अवसंरचना परियोजनाओं से जुड़े जोखिम कम किए जा सकें।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इन पहलों को भारत की दीर्घकालिक समुद्री रणनीति के अहम स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि भारत कंटेनर शिपिंग लाइन और आउटर हार्बर के लिए वित्तपोषण, राष्ट्रीय शिपिंग क्षमता को मजबूत करने, बंदरगाह अवसंरचना को उन्नत करने और आत्मनिर्भर भारत तथा ‘मेरीटाइम अमृत काल 2047’ के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम हैं।

उन्होंने कहा, “ये MoU प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विज़न को वास्तविक समुद्री क्षमता में बदलने का प्रमाण हैं। बजट 2026–27 में घोषित CMAS के अनुरूप भारत कंटेनर शिपिंग लाइन, भारत के कंटेनर व्यापार को भारतीय हाथों में सुदृढ़ करेगी, जबकि आउटर हार्बर का वित्तपोषण हमारे बंदरगाह ढांचे को मजबूत करेगा। दोनों मिलकर विकसित भारत की ओर बढ़ते हुए वैश्विक समुद्री व्यापार में भारत की रणनीतिक और वाणिज्यिक उपस्थिति को बढ़ावा देंगे।”

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह हस्ताक्षर लंबे समय से लंबित राष्ट्रीय लक्ष्य की पूर्ति को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में हम गति, समन्वय और समयबद्ध स्वीकृतियों को सुनिश्चित कर रहे हैं। CONCOR के साथ साझेदारी में राष्ट्रीय कंटेनर लाइन के विकास से भारत एक मजबूत, विश्वस्तरीय कंटेनर इकोसिस्टम बना सकता है।”

केंद्रीय राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर ने कहा कि ये समझौते भारत की बढ़ती समुद्री महत्वाकांक्षाओं को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, “ये MoU प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की दूरदर्शिता को दर्शाते हैं, जिनके नेतृत्व में भारत समुद्री क्षेत्र में पुनरुत्थान की ओर बढ़ रहा है और देश को समुद्र में भी एक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया जा रहा है।”

भारत, जो वर्तमान में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जिसके 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर की GDP तक पहुंचने का अनुमान है, में निर्यात–आयात और कंटेनरीकृत कार्गो आवाजाही में तेज़ वृद्धि की संभावना है। अधिकारियों ने कहा कि अतीत में एक मजबूत भारतीय कंटेनर कैरियर की कमी के कारण निर्यातकों और आयातकों को अस्थिर फ्रेट दरों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों का सामना करना पड़ा जिस कमी को BCSL दूर करने का लक्ष्य रखती है।

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