भारत में धीमी बिक्री से जूझ रही निसान मोटर्स इंडिया एक और मुश्किल में फंस गई है। सीमित दो-मॉडल पोर्टफोलियो के साथ काम कर रही कंपनी जहां अपने नए SUV एक्स-ट्रेल (ग्रैविटी) की लॉन्चिंग की तैयारी कर रही है, वहीं आंतरिक विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। निसान की अधिकृत डीलरशिप You We And Cars ने जापानी ऑटोमोबाइल कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है।
गुरुग्राम की एक्सक्लूसिव कमर्शियल कोर्ट में दाखिल याचिका में डीलर ने आरोप लगाया है कि निसान इंडिया मनमानी शर्तें थोप रही है। विवाद का मुख्य मुद्दा “फोर्स्ड इन्वेंट्री” है, जिसके तहत डीलरों पर कम मांग के बावजूद गाड़ियां खरीदने का दबाव बनाया जाता है। आरोप है कि आदेश न मानने पर कंपनी डीलर की वैध कमीशन राशि रोक लेती है।
मारुति सुजुकी, हुंडई और टोयोटा जैसी दिग्गज कंपनियों से मुकाबले में पिछड़ रही निसान के लिए यह अंदरूनी विवाद आने वाले प्रोडक्ट लॉन्च पर भी असर डाल सकता है।
कानूनी विवाद के बावजूद, निसान ने हाल ही में 26% मुनाफे में वृद्धि की जानकारी दी है। भारत में कंपनी की मासिक बिक्री 1,902 यूनिट और वैश्विक स्तर पर 15,000 से अधिक यूनिट रही। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने निसान मोटर इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर सौरभ वत्स सहित चार वरिष्ठ अधिकारियों को समन जारी किया है।
कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 9 फरवरी 2026 तय की है और कंपनी को अपने बचाव में सभी दस्तावेज और सबूत पेश करने का निर्देश दिया है। समन जारी किए गए अधिकारियों में शामिल हैं:
विवेक पलिवाल (सेल्स डायरेक्टर)
अतुल अग्रवाल (आफ्टर-सेल्स डायरेक्टर)
अभिषेक अरोड़ा (वरिष्ठ अधिकारी)
डीलरों का आरोप है कि अचानक नीतियों में बदलाव कर शोरूम्स पर जबरन स्टॉक डंप किया जा रहा है। साथ ही, प्रोत्साहन राशि में देरी और घटते मुनाफे से उनके जीवनभर की पूंजी दांव पर लग गई है।
You We And Cars के मालिक राजीव बख्शी ने कहा कि कोर्ट जाना आखिरी विकल्प था।
उन्होंने कहा, “हम अपनी जीवन भर की कमाई किसी ब्रांड को खड़ा करने में लगाते हैं। हम कंपनी और ग्राहकों के बीच सेतु होते हैं। लेकिन जब नीतियां एकतरफा हो जाएं और हमारी बात न सुनी जाए, तो न्याय के लिए अदालत ही एकमात्र रास्ता बचता है। यह सिर्फ मेरी लड़ाई नहीं, बल्कि देशभर के डीलरों के आत्मसम्मान और अस्तित्व का सवाल है।”
फिलहाल निसान इंडिया की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, ऑटो उद्योग के जानकारों का मानना है कि कंपनी इस विवाद को आंतरिक रूप से सुलझाने की कोशिश कर सकती है, ताकि डीलर नेटवर्क के साथ बड़ा टकराव न हो।
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