अंतिम खेत तक पहुँचा पानी: कैसे नहरों का पानी पंजाब की खेती को बदल रहा है

अंतिम खेत तक पहुँचा पानी: कैसे नहरों का पानी पंजाब की खेती को बदल रहा है

नहरों का पानी अब पंजाब के सबसे दूरस्थ खेतों तक पहुँच गया है, जिससे किसानों को फसलों की सिंचाई बेहतर ढंग से करने में मदद मिल रही है और भूजल पर निर्भरता कम हो रही है। इस प्रगति से कृषि उत्पादन बढ़ने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

पानी पंजाब की कृषि की जीवनरेखा है। दशकों तक कई किसानों को भूमिगत जल पर अत्यधिक निर्भर रहना पड़ा, खासकर उन किसानों को जो नहरों के अंतिम छोर पर स्थित थे और जिन्हें नियमित रूप से नहर का पानी नहीं मिल पाता था। इसके कारण भूजल स्तर गिरता गया, लागत बढ़ती गई और सिंचाई की सुविधा असमान हो गई।

अब पंजाब सरकार ने इस स्थिति को बदलने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। नहरों के पुनरुद्धार और बेहतर प्रबंधन के जरिए यह सुनिश्चित किया गया है कि नहरों का पानी सबसे अंतिम खेत तक भी पहुँचे। इससे पूरे राज्य में खेती का स्वरूप बदल रहा है।

सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह है कि कई इलाकों में पहली बार नहरों का पानी टेल-एंड खेतों तक पहुँचा है। ये वे खेत हैं जो पहले नियमित जल आपूर्ति से वंचित रहते थे। नहरों की मरम्मत और बेहतर प्रबंधन से अब पानी उन किसानों तक पहुँच रहा है, जिन्हें पहले नजरअंदाज किया जाता था।

एक किसान ने कहा,“पहले हमारे खेतों तक कभी नहर का पानी नहीं आता था। हमें ट्यूबवेल पर निर्भर रहना पड़ता था। अब नहर का पानी सीधे हमारे खेत तक पहुँचता है। हमारी लागत कम हो गई है।”

व्यापक मरम्मत और पुनरुद्धार कार्यों के कारण अब पंजाब की सिंचाई का एक बड़ा हिस्सा नहरों के पानी से हो रहा है। इससे तेजी से घट रहे भूजल पर दबाव कम हुआ है।

नहरों से अधिक सिंचाई का मतलब है:

1. बिजली की कम खपत
2. किसानों की कम लागत
3. टिकाऊ जल प्रबंधन

सरकार ने बहाल किया है:

1. प्रमुख नहरें
2. वितरिकाएँ
3. छोटी नहरें 

ये जल मार्ग वर्षों से उपेक्षित थे, जिससे रिसाव और जाम की समस्या पैदा हो गई थी। सफाई और मरम्मत से अब सिंचाई तंत्र की हर शाखा तक पानी पहुँच रहा है। हजारों किलोमीटर लंबे जल मार्गों को फिर से जीवित किया गया है ताकि पानी का प्रवाह सुचारु रहे।

नहरों का पानी किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। इसका मतलब है:

1. ट्यूबवेल पर कम निर्भरता
2. बिजली की खपत में कमी
3. बेहतर फसल उत्पादन
4. अधिक भरोसेमंद सिंचाई

एक किसान ने साझा किया, “अब हमें न तो बिजली कटौती की चिंता रहती है और न ही सूखे कुओं की। नहर का पानी स्थिर और भरोसेमंद है।”

भूजल से नहरों के पानी की ओर बदलाव कर पंजाब अपने पर्यावरण की रक्षा कर रहा है। भूजल स्तर स्थिर हो रहा है, जो राज्य में खेती के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। यह कदम जलवायु-संवेदनशील कृषि को भी समर्थन देता है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने नहर पुनरुद्धार को एक ऐतिहासिक सुधार बताया है।
उन्होंने कहा, “पानी हर किसान का हक है। हमने यह सुनिश्चित किया कि नहर की लाइन में अंतिम किसान तक भी पानी पहुँचे। यही कृषि में सच्चा न्याय है।”

नहरों को बहाल कर और जल का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित कर पंजाब एक मजबूत और टिकाऊ कृषि प्रणाली की ओर बढ़ रहा है। किसान पैसा बचा रहे हैं, फसलें बेहतर हो रही हैं और पर्यावरण सुरक्षित रह रहा है।

नहर का पानी अब किसी विशेषाधिकार की चीज़ नहीं रहा, यह अब हर उस खेत तक पहुँच रहा है जिसे इसकी ज़रूरत है।

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