पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को आज दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ा झटका लगा। अदालत ने ‘ज़मीन के बदले नौकरी’ मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोप तय कर दिए हैं। अब इस केस में ट्रायल चलेगा, जिसमें सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
CBI की विशेष अदालत ने लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव सहित कुल 40 आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी (Section 420), आपराधिक साजिश (Section 120B IPC) और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप तय किए। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच एजेंसी के पास ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य मौजूद हैं, जिससे प्रथम दृष्टया साजिश की पुष्टि होती है।
कोर्ट के अनुसार, इस मामले में जमीनों का लेन-देन नौकरी पाने की शर्त के रूप में हुआ और संपत्तियाँ परिवार के सदस्यों तथा उनसे जुड़े व्यक्तियों के नाम पर ट्रांसफर की गईं। जांच में यह भी सामने आया कि नियुक्तियाँ कथित तौर पर नियमित भर्ती प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई थीं।
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव UPA सरकार में रेल मंत्री थे। CBI ने इसमें भ्रष्टाचार की FIR दर्ज की थी, जबकि ED ने धन के कथित अवैध स्रोत की जांच के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था।
CBI की चार्जशीट में कुल 103 नाम शामिल थे, जिनमें से 5 आरोपियों का निधन हो चुका है और 52 को पहले ही कोर्ट द्वारा राहत मिल चुकी है। बाकी बचे आरोपियों पर अब आरोप तय हुए हैं। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 29 जनवरी निर्धारित की है, जिसमें औपचारिक चार्ज पढ़े जाएंगे और ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
यह केस देश में सरकारी नौकरियों के कथित दुरुपयोग और संपत्ति लेन-देन से जुड़ी सबसे चर्चित कानूनी लड़ाइयों में से एक बना हुआ है।
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