कोलकाता के पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बीच टकराव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। ED ने आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी ने चुनावी रणनीति देने वाली संस्था I-PAC से जुड़े ठिकानों पर चल रही छापेमारी में हस्तक्षेप किया और जांच में बाधा डाली।
ED अधिकारियों ने धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) जांच के तहत I-PAC से जुड़े कुल 10 स्थानों पर छापेमारी की थी। यह जांच 2020 से सक्रिय बताए जा रहे कोयला तस्करी सिंडिकेट से जुड़ी है, जिसका कथित मास्टरमाइंड अनूप माजी (लाला) है। I-PAC ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) को चुनावी सलाह दी थी और इसी कड़ी में उसके निदेशक प्रतीक जैन से जुड़े ठिकानों को भी जांच के दायरे में लाया गया।
ED का आरोप है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं पुलिस बल के साथ प्रतीक जैन के आवास और साल्ट लेक स्थित I-PAC कार्यालय पहुंचीं। ED के अनुसार, वहां से हार्ड डिस्क समेत कई दस्तावेज उठा लिए गए, जिससे एजेंसी की “शांतिपूर्ण जांच” बाधित हुई। इसी आधार पर ED ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है और जांच में हस्तक्षेप का मुद्दा उठाया है।
वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ED और केंद्र की भाजपा सरकार मिलकर 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस का चुनावी डाटा चुराने की कोशिश कर रही है। उनका दावा है कि जो दस्तावेज और हार्ड डिस्क ले जाए गए, वे पार्टी से जुड़े थे, न कि किसी आपराधिक जांच से।
इस बीच पश्चिम बंगाल पुलिस ने भी पलटवार करते हुए ED अधिकारियों के खिलाफ कथित अवैध प्रवेश (ट्रेसपासिंग) को लेकर FIR दर्ज की है। राज्य पुलिस का कहना है कि ED ने तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच चल रहे तनाव को उजागर कर दिया है, खासकर वित्तीय अनियमितताओं की जांच को लेकर। अब सबकी निगाहें कलकत्ता हाईकोर्ट पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि जांच में हस्तक्षेप के आरोपों पर आगे क्या कार्रवाई होती है।
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