पंजाब के स्कूल्स ऑफ एमिनेंस: सरकारी कक्षाओं के भीतर आकार लेता एक नया भविष्य

पंजाब के स्कूल्स ऑफ एमिनेंस

दशकों तक भारत में सरकारी स्कूलों को अक्सर अंतिम विकल्प के रूप में देखा जाता था जहाँ परिवार तभी अपने बच्चों को भेजते थे जब वे निजी शिक्षा का खर्च वहन नहीं कर सकते थे। अब पंजाब इस सोच को बदल रहा है। अपने महत्वाकांक्षी स्कूल्स ऑफ एमिनेंस कार्यक्रम के माध्यम से राज्य सरकार सरकारी स्कूलों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा के केंद्रों में बदल रही है।

ये स्कूल केवल इमारतें नहीं हैं, बल्कि सार्वजनिक शिक्षा देने के तरीके में एक सम्पूर्ण बदलाव का प्रतीक हैं। पंजाब सरकार ने पूरे राज्य में 117 स्कूल्स ऑफ एमिनेंस स्थापित करने की घोषणा की है। चयनित सरकारी स्कूलों को उन्नत कर इन्हें विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त संस्थानों के रूप में विकसित किया जा रहा है।

ये स्कूल शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में फैले हुए हैं, ताकि हर पृष्ठभूमि के बच्चों को समान स्तर की शिक्षा मिल सके। स्कूल्स ऑफ एमिनेंस में पढ़ने वाले छात्रों को अब वे सुविधाएँ मिल रही हैं, जो पहले केवल चुनिंदा निजी स्कूलों में ही उपलब्ध थीं। इनमें शामिल हैं, स्मार्ट कक्षाएँ (डिजिटल बोर्ड के साथ)
 विज्ञान, गणित और कंप्यूटर प्रयोगशालाएँ
समृद्ध पुस्तकालय
खेल मैदान और इनडोर गतिविधि क्षेत्र
कला, संगीत और कौशल-विकास कक्ष
सुरक्षित, स्वच्छ और आधुनिक स्कूल भवन

इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का कहना है कि सीखने का माहौल अब कहीं अधिक रोचक और प्रेरणादायक हो गया है।

एक छात्र ने बताया,“पहले हमारा स्कूल बहुत साधारण था। अब हमारे पास स्मार्ट बोर्ड और लैब हैं। हम चीज़ों को बेहतर समझते हैं और स्कूल आना अच्छा लगता है।”

एक अन्य छात्र ने कहा,“हमें यहाँ पढ़ने पर गर्व महसूस होता है। यह एक बड़े निजी स्कूल जैसा दिखता है, लेकिन यह सरकारी है।”

यह सुनिश्चित करने के लिए कि दूरी के कारण कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, पंजाब सरकार स्कूल्स ऑफ एमिनेंस के छात्रों को निःशुल्क बस परिवहन सुविधा दे रही है। यह विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों के बच्चों के लिए उपयोगी है, जिन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

बस सेवा का उपयोग करने वाले एक छात्र ने कहा,“पहले स्कूल पहुँचना मुश्किल था। अब सरकारी बस हमें सुरक्षित तरीके से घर से स्कूल और स्कूल से घर छोड़ती है। अब हम कक्षाएँ नहीं छोड़ते।”

इस कदम से उपस्थिति बढ़ी है और स्कूल छोड़ने की दर में कमी आई है।

स्कूल्स ऑफ एमिनेंस केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास पर भी ज़ोर देते हैं। छात्रों को खेल, वाद-विवाद, विज्ञान मेले, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और कौशल-आधारित सीख में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

इसका उद्देश्य बच्चों को केवल बोर्ड परीक्षाओं के लिए नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा और आधुनिक करियर के लिए तैयार करना है।

कई अभिभावकों के लिए ये स्कूल महंगी निजी शिक्षा का बोझ कम कर रहे हैं। एक अभिभावक ने कहा,
“हम बड़े निजी स्कूलों का खर्च नहीं उठा सकते थे। अब हमारा बच्चा एक सरकारी स्कूल में पढ़ रहा है, जहाँ सुविधाएँ निजी स्कूलों से भी बेहतर हैं।”

इससे मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों को अपने बच्चों को जीवन की मजबूत शुरुआत देने में मदद मिल रही है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने स्कूल्स ऑफ एमिनेंस को पंजाब की शिक्षा क्रांति की आधारशिला बताया है।

उन्होंने कहा,“हर बच्चे में प्रतिभा होती है, चाहे वह गाँव के स्कूल में पढ़ता हो या शहर के स्कूल में। हमारा काम है उन्हें बेहतरीन सुविधाएँ देना, ताकि वे आगे बढ़ सकें। स्कूल्स ऑफ एमिनेंस पंजाब के हर बच्चे को समान अवसर देने के लिए बनाए गए हैं।”

आधुनिक बुनियादी ढाँचे, प्रशिक्षित शिक्षकों, निःशुल्क परिवहन और उत्साही छात्रों के साथ, पंजाब के स्कूल्स ऑफ एमिनेंस सार्वजनिक शिक्षा के लिए एक नया मानदंड स्थापित कर रहे हैं।

ये साबित करते हैं कि जब सरकार स्कूलों में निवेश करती है, तो एक पूरी पीढ़ी का भविष्य उज्ज्वल हो जाता है।

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