न्यूयॉर्क की एक अदालत में खुद को “युद्धबंदी” बताते हुए अपदस्थ वेनेजुएला नेता निकोलस मादुरो ने अमेरिका द्वारा लगाए गए ड्रग और नार्को-आतंकवाद के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। मादुरो ने दलील दी कि कराकास में अमेरिकी बलों द्वारा उनकी गिरफ्तारी कोई कानून-प्रवर्तन कार्रवाई नहीं, बल्कि एक सैन्य अभियान था। उन्होंने सभी आरोपों में खुद को निर्दोष बताया।
जब न्यूयॉर्क की अदालत में पेश होते हुए मादुरो ने खुद को “प्रिजनर ऑफ वॉर” कहा, तो यह सिर्फ गिरफ्तारी का विरोध नहीं था। यह उस पूरे कानूनी ढांचे को चुनौती देने की कोशिश थी, जिसके तहत अमेरिका उन्हें अदालत में कटघरे में खड़ा करना चाहता है और साथ ही वॉशिंगटन के दावों में छिपे विरोधाभासों को भी उजागर करता है।
अमेरिकी डेल्टा फोर्स द्वारा कराकास के एक परिसर से सप्ताहांत में मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़े जाने के महज 48 घंटे के भीतर, मादुरो ने नार्को-आतंकवाद, कोकीन तस्करी और आपराधिक साजिश से जुड़े गंभीर संघीय आरोपों में खुद को निर्दोष बताया। उन्होंने अदालत में कहा कि वह कोई आपराधिक आरोपी नहीं हैं, बल्कि उन्हें “अगवा” किया गया है, क्योंकि यह कार्रवाई पुलिस नहीं बल्कि सैन्य बलों द्वारा की गई थी।
खुद को युद्धबंदी बताकर मादुरो यह संकेत दे रहे हैं कि उनकी गिरफ्तारी को न्यायिक कार्रवाई नहीं, बल्कि युद्ध की कार्रवाई के रूप में देखा जाना चाहिए। भले ही अदालत में यह तर्क टिक न पाए, लेकिन इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक विरोध और कानूनी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
यह अंतर इसलिए अहम है क्योंकि इससे अमेरिका की कार्रवाई को सही ठहराने की बुनियाद प्रभावित होती है। अगर मादुरो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्धबंदी माने जाते हैं, तो उनके साथ व्यवहार जिनेवा कन्वेंशन के तहत होना चाहिए। युद्धबंदियों पर सिर्फ किसी शत्रु पक्ष से जुड़े होने के आधार पर मुकदमा नहीं चलाया जाता, उन्हें नागरिक अदालतों में युद्धकालीन आचरण के लिए पेश नहीं किया जाता और आमतौर पर युद्ध समाप्त होने तक हिरासत में रखा जाता है, न कि सजा सुनाई जाती है।
हालांकि ट्रंप प्रशासन का कहना है कि वेनेजुएला में की गई यह कार्रवाई एक कानून-प्रवर्तन अभियान थी, जिसका उद्देश्य लंबे समय से अभियुक्त एक संदिग्ध को अमेरिकी अदालत के सामने लाना था। प्रशासन ने 1989 में पनामा के तानाशाह मैनुअल नोरीएगा को ड्रग आरोपों में पकड़े जाने की मिसाल भी दी है।
अदालत में जज एल्विन के. हेलरस्टीन ने स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल मादुरो का मामला अन्य संघीय आपराधिक मामलों की तरह ही आगे बढ़ेगा।
अमेरिकी अभियोजकों का आरोप है कि 1999 में सार्वजनिक जीवन में प्रवेश करने के बाद से दो दशकों से अधिक समय तक मादुरो और उनके करीबी सहयोगियों ने वेनेजुएला को अमेरिका जाने वाले कोकीन की खेप का केंद्र बना दिया।
अभियोग पत्र के मुताबिक, मादुरो, उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस, उनके बेटे निकोलस एर्नेस्टो मादुरो गुएरा और उनके वरिष्ठ सहयोगियों ने कोलंबिया के एफएआरसी, मैक्सिको के सिनालोआ और ज़ेटास कार्टेल, और वेनेजुएला के कुख्यात गिरोह ट्रेन दे अरागुआ जैसे संगठनों के साथ साझेदारी की। अमेरिका इन सभी को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है।
अभियोजकों का कहना है कि इस नेटवर्क ने ड्रग तस्करी के लिए “कानून-प्रवर्तन सुरक्षा और लॉजिस्टिक समर्थन” उपलब्ध कराया, सरकारी संस्थाओं का दुरुपयोग किया और वेनेजुएला के रास्ते कोकीन की सुरक्षित आवाजाही के बदले रिश्वत ली।
आरोपों में कहा गया है कि 2013 में राष्ट्रपति बनने के बाद मादुरो ने ड्रग व्यापार को “अपने, अपने शासन के सदस्यों और अपने परिवार के हित में फलने-फूलने दिया।” उनकी पत्नी, जो वेनेजुएला की नेशनल असेंबली की पूर्व प्रमुख रह चुकी हैं, पर भी ड्रग तस्करी से जुड़े सौदों में लाखों डॉलर की रिश्वत लेने का आरोप है।
मादुरो लंबे समय से इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते आए हैं। अदालत में उनके वकील ने दलील दी कि एक संप्रभु देश के नेता के रूप में मादुरो को अभियोजन से छूट मिलनी चाहिए और उन्हें जबरन अमेरिका लाना अवैध है।
अदालत कक्ष से ले जाते समय मादुरो ने फिर कहा कि उन्हें “अगवा” किया गया है और वह अब भी वेनेजुएला के वैध राष्ट्रपति हैं।
हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मादुरो के ये बयान मामले की दिशा बदलने वाले नहीं हैं। *न्यूयॉर्क टाइम्स* के हवाले से पूर्व संघीय अभियोजक और कोलंबिया लॉ स्कूल के प्रोफेसर डैनियल सी. रिचमैन ने कहा, “चाहे वह प्रतिरक्षा या अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला दें, इस मामले का निपटारा एक आपराधिक मुकदमे के तौर पर ही होगा।”
रिचमैन ने यह भी कहा कि अदालत के अधिकार क्षेत्र को मानने से मादुरो का इनकार कार्यवाही को जटिल बना सकता है। “आपराधिक मामलों में यह अपेक्षा होती है कि आरोपी कम से कम प्रारंभिक तौर पर अदालत के अधिकार को स्वीकार करे। जब कोई इसे पूरी तरह नकार देता है, तो कार्यवाही गंभीर रूप से बाधित हो सकती है।”
फिर भी, मादुरो का तर्क अदालत से बाहर भी असर पैदा करता है, क्योंकि यह प्रशासन की अपनी भाषा से टकराता है। जहां एक ओर अमेरिकी अधिकारी कराकास की कार्रवाई को नागरिक प्रकृति का बताते हैं, वहीं दूसरी ओर वे वेनेजुएला और ड्रग नेटवर्क के खिलाफ अपने कदमों को अर्ध-सैन्य शब्दों में भी वर्णित करते रहे हैं।
पिछले कई महीनों से अमेरिकी बल कैरिबियन और प्रशांत महासागर में ड्रग तस्करी से जुड़े संदिग्ध जहाजों को निशाना बना रहे हैं। इन कार्रवाइयों को आंशिक रूप से न्याय विभाग के एक गोपनीय ज्ञापन के आधार पर सही ठहराया गया है, जिसमें दावा किया गया है कि अमेरिका ड्रग कार्टेल्स के साथ सशस्त्र संघर्ष में है।
जब मादुरो अपनी गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती दे रहे थे और खुद को “निर्दोष व्यक्ति” बता रहे थे, तब जज हेलरस्टीन ने उन्हें रोकते हुए कहा कि इन दलीलों को उठाने के लिए “समय और स्थान” तय होगा। फिलहाल अमेरिका का कहना है कि मादुरो सिर्फ एक ऐसे आरोपी हैं, जिन पर बेहद गंभीर आपराधिक आरोप लगे हैं।
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