प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को दो दिवसीय यात्रा पर इजरायल रवाना हुए, जिनका उद्देश्य भारत-इजरायल के रणनीतिक और नवाचार-आधारित सहयोग को और मजबूत करना है। यात्रा को लेकर सरकार ने इसे रक्षा, व्यापार, तकनीक और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के प्रयास के रूप में पेश किया, लेकिन विपक्ष ने भारत के फिलिस्तीन समर्थक इतिहास और गाजा में मानवीय संकट को उठाते हुए मोदी के इस कदम पर तीखी आलोचना की।
यह मोदी की इजरायल की नौ वर्षों में दूसरी यात्रा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इजरायल के बीच मजबूत और बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी है, और उनकी बातचीत का उद्देश्य विज्ञान, तकनीक, नवाचार, कृषि, जल प्रबंधन, रक्षा-सुरक्षा, व्यापार, निवेश और जन-संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ाना है।
मोदी यात्रा के दौरान इजरायली राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग और सांसदों से मुलाकात करेंगे और पहली बार कनेसट (इजरायली संसद) में अपने संबोधन के जरिए भारत-इजरायल के लोकतांत्रिक और संसदीय संबंधों को भी रेखांकित करेंगे। उन्होंने भारतीय डायस्पोरा से मिलने और उनके साथ भारत-इजरायल दोस्ती को मजबूत करने की उम्मीद जताई।
वहीं, कांग्रेस ने मोदी पर यात्रा के समय और गाजा में हो रहे नागरिक हमलों के बीच नेटन्याहू के साथ संबंध बनाने को लेकर तीखा हमला किया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी “मौलिक रूप से कायरता” दिखा रहे हैं। उन्होंने भारत के फिलिस्तीन समर्थक इतिहास को याद दिलाते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत ने हमेशा न्याय और शांति का समर्थन किया है।
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी मोदी से उम्मीद जताई कि वह गाजा में निर्दोष नागरिकों के हत्याकांड पर केनेसट में अपने संबोधन के दौरान सवाल उठाएंगे और न्याय की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा सत्य, शांति और न्याय के लिए खड़ा रहा है और आगे भी ऐसा करना चाहिए।
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