कांग्रेस ने 4 फरवरी को केंद्र सरकार से भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की। पार्टी ने चेतावनी दी कि इस समझौते का असर किसानों की आजीविका पर पड़ सकता है, इसलिए उन्हें इसके संभावित प्रभावों की स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए।
असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने कहा कि यदि संवेदनशील हितों से समझौता किया गया, तो यह करार किसानों पर भारी बोझ डाल सकता है। गुवाहाटी में “whoishbs” वेबसाइट लॉन्च के बाद ANI से बातचीत में गोगोई ने कहा कि पारदर्शिता बेहद ज़रूरी है, ताकि भारतीय किसान इस व्यापार समझौते के “संभावित प्रभाव” को समझ सकें।
उन्होंने कहा, “समझौते का पूरा विवरण सामने आना चाहिए। भारत ने क्या त्याग किया है? देश के किसान जानना चाहते हैं कि इस ट्रेड डील के कारण उन्हें कितना बोझ उठाना पड़ेगा।”
गोगोई की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब एक सप्ताह पहले ही भारत ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ एक अहम व्यापार समझौता किया था। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के बाद बातचीत को “शानदार” बताते हुए उम्मीद जताई थी कि भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाज़ार में बेहतर पहुंच मिलेगी।
इससे पहले, केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में भरोसा दिलाया था कि अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते में कृषि और डेयरी सेक्टर के हितों की सफलतापूर्वक रक्षा की गई है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस समझौते के तहत भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किया गया है, जबकि कुछ कृषि उत्पादों, कोयला और अन्य वस्तुओं पर अमेरिकी उत्पादों के लिए टैरिफ शून्य तक लाया जा सकता है।
यह समझौता तब हुआ, जब अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 18 प्रतिशत तक प्रतिशोधात्मक शुल्क लगाया था, जिसके बाद व्यापार तनाव कम करने के लिए बातचीत शुरू हुई। संसद में उठी चिंताओं के जवाब में पीयूष गोयल ने लोकसभा को बताया कि यह समझौता लगभग दो वर्षों की बातचीत का नतीजा है और भारतीय अर्थव्यवस्था के संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं।
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