पूर्व ऑल असम माइनॉरिटीज स्टूडेंट्स यूनियन (AAMSU) अध्यक्ष रेजाउल करीम सरकर ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने असम में पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ “गंभीर वैचारिक और नैतिक मतभेद” होने का आरोप लगाया।
14 जनवरी 2026 को APCC अध्यक्ष गौरव गोगोई को लिखे अपने इस्तीफे में सरकर ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस में शामिल होकर उसकी धर्मनिरपेक्ष मूल्यों, समावेशी विचारधारा और संवैधानिक सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता से प्रेरित होकर कदम रखा था।
हालांकि, सरकर ने बताया कि हाल ही में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं, विशेषकर असम कांग्रेस विधायिका दल के नेता देबब्रत साइकिया और नागांव सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के बयान और सार्वजनिक रुख ने उन्हें “गहरी नैतिक और वैचारिक पीड़ा” दी। इससे उनका मनोबल गिरा और उनकी सार्वजनिक छवि को भी नुकसान पहुँचा।

अपने इस्तीफे में उन्होंने आरोप लगाया कि इन दोनों नेताओं का रुख हाल के मुद्दों पर पार्टी में बने रहना उनके लिए असंभव बना देता है। सरकर ने उनके व्यवहार को “बीजेपी एजेंट्स” के समान बताया और कहा कि उनकी पार्टी में मौजूदगी ने उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया।
“ऐसे हालात में मैं पार्टी के साथ अपनी सदस्यता बनाए रखना मुश्किल समझता हूँ,” सरकर ने लिखा और कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने फिर भी पार्टी के भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं।
रेजाउल करीम असम में एक प्रमुख अल्पसंख्यक युवा नेता हैं और पहले AAMSU के अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके इस्तीफे से विशेष रूप से अल्पसंख्यक बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीतिक हलचल होने की संभावना है।
इस इस्तीफे पर APCC या पत्र में नामित नेताओं की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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