भारत का मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम निर्णायक चरण की ओर बढ़ रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 2027 में गगनयान मिशन लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है, जिसके बाद 2028 तक मानवयुक्त चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 मिशन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। यह जानकारी ISRO के अध्यक्ष वी. नारायणन ने दी।
कार्ययोजना के बारे में बताते हुए नारायणन ने कहा कि गगनयान कार्यक्रम के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले तीन मानवरहित (अनक्रूड) मिशन पूरे किए जाएंगे। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में हम 2027 को लक्ष्य बनाकर गगनयान कार्यक्रम पर काम कर रहे हैं। तीन अनक्रूड मिशन होने हैं और हम उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”
पहले मानवरहित मिशन की सटीक तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन तैयारियां लगातार प्रगति पर हैं। उन्होंने कहा, “तारीख अभी अंतिम नहीं हुई है, लेकिन हम उस दिशा में काम कर रहे हैं।”
नारायणन ने पुष्टि की कि चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है और ये मानवयुक्त चंद्र मिशन होंगे। उन्होंने कहा, “चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 दोनों स्वीकृत कार्यक्रम हैं और यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो 2028 तक ये मिशन पूरे होंगे।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि “सभी गतिविधियां तय समय-सीमा के अनुसार आगे बढ़ रही हैं।”
ISRO का एक प्रमुख फोकस क्षेत्र पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान (Reusable Launch Vehicle) तकनीक का विकास है, जिसे नारायणन ने लागत कम करने के लिए बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा, “जब आप पुन: प्रयोज्य लॉन्चर चुनते हैं, तो लागत प्रभावी हो जाता है। हम फिलहाल इस तकनीक के विकास पर काम कर रहे हैं। अभी यह एक प्रायोगिक कार्यक्रम है।”
वैश्विक प्रतिस्पर्धा, खासकर स्पेसएक्स से तुलना पर प्रतिक्रिया देते हुए नारायणन ने कहा कि ISRO अपने प्रयासों को किसी प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं देखता। उन्होंने कहा, “हम इसे किसी से प्रतिस्पर्धा नहीं मानते, क्योंकि भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम भारत के लिए है,” और जोड़ा कि “ताकत केवल ताकत का सम्मान करती है।”
उन्होंने भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं से जुड़े व्यापक आर्थिक लक्ष्यों पर भी जोर दिया। नारायणन ने कहा कि ISRO देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी को 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 8 प्रतिशत करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। उन्होंने कहा, “हम पूरे देश में आम नागरिक की सेवा कर रहे हैं और माननीय प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में हमने अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को 2% से 8% तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है।”
नारायणन ने किसी भी तरह की असफलता की धारणा को खारिज करते हुए कहा कि तकनीकी समीक्षाएं सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, “हम किसी भी चीज को असफलता नहीं मानते। सब कुछ सीखने के लिए है,” और बताया कि PSLV मिशनों से मिले आंकड़ों का विश्लेषण इस प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है।
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